Meerut mawana viral video-मेरठ के मवाना में आपस में भिड़े सपा नेता,वीडियो वायरल

मेरठ के मवाना में मंच पर आपस में भिड़े सपा नेता, वीडियो वायरल

Meerut mawana viral video- यूपी चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर PDA यानि पिछड़ा,दलित,अल्पसंख्यक का नारा बुलंद कर दिया है।सपा प्रमुख अखिलेश यादव इसे विधानसभा चुनाव की संजीवनी बूटी मान रहे हैं,जो उनकी चुनावी वैतरणी को पार लगाएगा।उनका ऐसा सोचना लाजमी भी है।लोकसभा चुनाव में पार्टी ने इसे नारे के भरोसे बीजेपी के विजय रथ को यूपी में रोक दिया था।लेकिन असल धरातल पर इस संजीवनी का असर कैसा है,इसकी एक छोटी सी बानगी मेरठ के मवाना में देखने को मिली।

मवाना में समाजवादी पार्टी के एक कार्यक्रम में इस संजीवनी का ऐसा प्रदर्शन हुआ कि,मंच पर मौजूद नेतागण मर्यादा की धोती संभालते नजर आए।इस मंच संग्राम का पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर ऐसे तैर रहा है,जैसे सावन के महीने में बाढ़ आ गई हो।चलिये आपको बताते हैं कि, आखिर समाजवादी पार्टी के इस पीडीए वाले टॉनिक में यादव फैक्टर का साइड इफेक्ट कैसे पूरे पार्टी की पूरी फजीहत कर गया।

गैरों ने नहीं अपनों ने ही खोल दी PDA की पोल!

हुआ यूं कि,मवाना में सपा ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। कार्यक्रम का मकसद था, कार्यकर्ताओं में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए जोश भरना और जनता को ये बताना कि,समाजवादी पार्टी और उसका PDA ही विकास की गारंटी है।उनका सच्चा हमदर्द है।लिहाजा मंच सज गया,कार्यकर्ता और नेतागण भी पहुंच गए।बस पटकथा लिखी जानी बाकी थी।इसके लिए मंच पर विराजमान पूर्व विधायक योगेश वर्मा और प्रभुदयाल वाल्मीकि जैसे कद्दावर नेता तैयारी कर ही रहे थे। माहौल भी पूरी तरह समाजवादी हो चुका था,तभी अचानक एंट्री हुई समाजवादी के सेक्टर प्रभारी सतपाल यादव की।

क्या था पूरा मामला?

कार्यक्रम में मौजूद लोगों के मुताबिक, सतपाल यादव जैसे ही मंच पर पहुंचे, उनका पारा चढ़ गया। ऐसा लग रहा था मानो जून की तपती गर्मी भी सतपाल यादव के आगे फीकी पड़ गई हो।सतपाल यादव ने एक बार पूरा मंच निहारा,उनकी तपतपाई आंखे अपनी बिरादरी के नेताओं को तलाश रही थी।लेकिन जब उन्हें अपनी बिरादरी का कोई भी नेता मंच पर दिखाई नहीं दिया।तो उनका पारा और चढ़ गया। फिर क्या था उन्होंने माइके के साथ-साथ मर्यादा को भी ताक पर रख दिया।फिर जो हुआ,वो सपा की नाक कटाने वाला था।सतपाल यादव का सपाई स्टाइल में संवाद हर तरफ सुर्खियां बटोर रहा था।

यादवों की पार्टी में मंच पर यादव नहीं

देखते ही देखते सतपाल यादव का ये सपा संवाद सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। वायरल वीडियो में जो दावा किया जा रहा है,वो दरअसल सपा की नाक डुबोने वाला है।आलाकमान के कानों में पिघला हुआ सीसा डालने जैसा है। वायरल वीडियो के मुताबिक, सतपाल यादव ने तीखे लहजे में अपनी ही पार्टी के नेताओं को याद दिलाया,कि ‘’समाजवादी पार्टी यादवों की पार्टी है और मंच पर यादवों को ही जगह नहीं दी गई!’’

अब बताइए भाई साहब, एक तरफ तो अखिलेश भैया दिन-रात मेहनत करके PDA का नया नैरेटिव सेट कर रहे हैं, जिससे पार्टी पर से एक जाति विशेष का ठप्पा हटाया जा सके। वहीं दूसरी तरफ उनके जमीनी सिपहसालार हैं,जिन्हें अखिलेश के इस मेहनत की जरा भी परवाह नहीं है।तभी तो भरे मंच से चीख-चीखकर समाजवादी पार्टी का पुराना कॉपीराइट क्लेम याद दिलाने लगे।

सतपाल यादव ने पुराना कॉपीराइट वाला मुद्दा उठा दिया था,और बात यादवों की थी,लिहाजा मंच पर मौजूद नेता भी सोचने लगे कि,अगर कुछ बोल दिया तो कहीं आलकमान से हमारे ऊपर ही गाज न गिरा दे।आखिरकार सतपाल यादव बात तो पते की ही कह रहे थे।

बीजेपी को बैठे-बिठाए मिल गया चुनावी मसाला!

विपक्ष में कलह मची हो,और सत्ता पक्ष दूरबीन लेकर देख न रहा हो,ये भला कैसे हो सकता है। उसे तो ऐसे मौकों की तलाश रहती है।मवाना में समाजवादी पार्टी के कार्यक्रम का वीडियो जैसे ही बीजेपी के खेमे में पहुंचा। उनके चेहरे खिल गए। अपनी विरोधी पार्टी में जाति की ऐसी लड़ाई देखकर उनका सीना गदगद होना तो लाजमी था।इस पूरे प्रकरण को लेकर बीजेपी नेताओं का कहना था कि,’’ जो पार्टी अपने ही नेताओं को मंच पर एडजस्ट नहीं कर पा रही, वो सूबे का जातीय का समीकरण कैसे साधेगी? ‘’

फिलहाल पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी आलाकमान ने चुप्पी साध रखी है।या यू कहें कि,मौन व्रत धारण कर रखा है।क्योंकि मवाना के वीडियो पर सफाई देना ‘आ बैल मुझे मार’ को दावत देना होगा।

संवाददाता

माजिद मजीदी

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