कन्नौज। Banwari Lal Dohre Jayanti-सियासत में एक कहावत प्रचलित है कि, नेताजी जब तक जीवित रहते हैं, तब तक कार्यकर्ताओं की भीड़ दिन-रात जिंदाबाद के नारे लगाती है,हमारा नेता कैसा हो,फलाने जैसा हो की बात कहती है। लेकिन जैसे ही नेता जी दिवंगत होते हैं,उनके जाने के बाद उनकी विरासत के साथ क्या खेल होता है,इसकी बानगी की अगर ताजा मिशाल कहीं देखनी हो,तो कन्नौज चले आइए।हम ऐसा क्यों कह रहे हैं, चलिये आपको बताते हैं।
कन्नौज के PSM महाविद्यालय में भारतीय जनता पार्टी के भूतपूर्व विधायक स्वर्गीय बनवारी लाल दोहरे की जयंती के मौके पर सेवा समर्पण दिवस का ऐसा अनोखा नजारा देखने को मिला, जिसे देखकर बनवारी लाल दोहरे के घर वाले भी हैरान हो गए। बनवारी लाल की जयंती पर सेवा का तो कहीं दूर-दूर तक पता नहीं चल रहा था,और समर्पण तो लग रहा था घास चरने चली गई थी।पूरी जयंती में अगर कुछ नजर आ रहा था,तो वो था अंदरूनी कलह,सियासी घमासान और ईगो क्लैश।
कहने को तो यह स्वर्गीय बनवारी लाल दोहरे स्मृति महोत्सव आयोजन समिति का कार्यक्रम था, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा है कि यह आयोजन सिर्फ और सिर्फ पूर्व सांसद और वरिष्ठ बीजेपी नेता सुब्रत पाठक का जिला इकाई को अपनी ताकत दिखाने का सारा खेल था।
विधायकों ने कार्यक्रम से बनाई दूरी
कहने को तो ये बीजेपी के ही पूर्व दिवंगत विधायक की जयंती का कार्यक्रम था,लेकिन इस कार्यक्रम से बीजेपी के ही विधायक और कई आला नेता नदारद दिखे।बता दें कि, कन्नौज की तीन विधानसभा सीटें हैं और तीनों पर ही सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के विधायकों का कब्जा हैं। लेकिन सियासत का खेल देखिए कि तीनों के तीनों माननीय विधायकों ने कार्यक्रम से ऐसी दूरी बनाई जैसे कि,उन्हें इस बात का इल्म ही न हो कि,उन्ही की पार्टी के एक पूर्व विधायक की जयंती है। और तो और विधायकों के साथ ही क्षेत्रीय अध्यक्ष का नया-नया कार्यभार संभालने वाले रामकिशोर शाहू ने भी कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी।
वैसे तो ऐसे मौके पर जिले के हर छोटे बड़े नेता साथ खड़े होकर फोटो खिंचवाते नजर आते हैं,लेकिन स्वर्गीय बनवारी लाल दोहरे की जयंती के मौके पर अनुशासन की पार्टी कहे जाने वाली बीजेपी में गुटबाजी साफ दिखी।पार्टी में इस गुटबाजी की महक ऐसे फैल रही थी कि,कन्नौज की इत्र भी अपनी महक को लेकर शर्मा जाए।
पत्नी को भूले आयोजक, पोते को भी दरकिनार का विशेष तमगा
इस स्मृति महोत्सव का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि,जिस दिवंगत नेता की जयंती मनाई जा रही थी,उसके परिवार को ही इस कार्यक्रम से साइडलाइन कर दिया गया था। आयोजनकर्ताओं ने स्वर्गीय बनवारी लाल दोहरे की धर्म पत्नी विद्यावती दोहरे को न तो कार्यक्रम में सम्मान सहित बुलाने की जहमत उठाई गई और न ही किसी होर्डिंग्स में उन्हें एक इंच की जगह नसीब हुई।
पत्नी तो पत्नी पोते को भी आयोजकों ने कार्यक्रम में ऐसे गौण कर दिया। जैसे कि,पार्टी को बनवारी लाल के पोते की जरूरत नही न हो।दिवंगत विधायक के परिजनों के साथ हुए इस व्यवहार की हर तरफ चर्चा हो रही है।लेकिन नेता जी को इसकी कहां फिक्र!उन्हें तो अपनी ताकत दिखाने का मौका चाहिए था,जो उन्होंने दिखा दिया।अब जनता को जो कहना-समझना है,खुद तय कर ले।
स्थानीय नहीं बाहरी मेहमानों से भरा था पंडाल
स्थानीय विधायक नहीं आए तो क्या हुआ,पूर्व सांसद जी ने इसकी भरपाई करने का भी पूरा इंतजाम किया था।आयोजन समिति ने बाहर से मेहमानों का ऐसा रेला बुलाया, मानो कन्नौज के नेताओं की कमी पड़ोसी जिलों से पूरी की जा रही हो। मुख्य अतिथि के रूप में बीजेपी अनुसूचित मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक रावत कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रहे थे।वही खुद पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने, बकायदा अध्यक्ष की कुर्सी का जिम्मा संभाल रखा था।
अशोक रावत के अलावा शाहजहांपुर के सांसद अरुण सागर, बिल्हौर के विधायक राहुल बच्चा सोनकर, और जिला पंचायत अध्यक्ष प्रिया शाक्य और औरैया के कमल दोहरे ने आकर स्थानीय नेताओं की कमी पूरी करने की भरपूर कोशिश की।
सपा को मिला बैठे-बिठाए मिला मुद्दा
अब जब सामने वाली पार्टी में इतनी दरार दिखाई पड़ रही हो,तो भला विपक्ष कहां चूकने वाला था।समाजवादी युवजन सभा (सयूस) के प्रदेश उपाध्यक्ष हसीब हसन ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बीजेपी पर जमकर तंज कसा।उन्होंने कहा कि’’यह कार्यक्रम पूर्व विधायक के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए था ही नहीं, बल्कि यह तो बीजेपी के भीतर ही अपने विरोधी गुट के विधायकों को नीचा दिखाने और पूर्व सांसद का खोया हुआ रसूख वापस पाने का एक फ्लॉप शक्ति प्रदर्शन था।‘’
सपा नेता ने तंज कसते हुए कहा—‘’बीजेपी वाले अपने अहंकार में इस कदर डूबे हैं कि जिसकी जयंती मना रहे हैं, उसी के परिवार को भूल गए। न बेटे की फोटो, न बुजुर्ग पत्नी को सम्मान और पोते नयन दोहरे को तो मंच पर ऐसे दरकिनार किया जैसे वो कोई बिन बुलाया मेहमान हो। लेकिन भैया, हमारी समाजवादी पार्टी में ऐसा नहीं है। हम समाजवादी लोग बुजुर्गों का और उनके परिवारों का दिल से सम्मान करना जानते हैं।‘’
फिलहाल, सेवा समर्पण दिवस तो खत्म हो गया, लेकिन इस आयोजन ने कन्नौज बीजेपी की अंदरूनी कलह का जो लाइव प्रसारण जनता के सामने किया है, उसकी गूंज आने वाले दिनों में लखनऊ तक सुनाई देगी।
संवाददाता
मुजाहिद मजीदी
कन्नौज
