DANGAWAS HATYAKAND

डांगावास हत्याकांड, 11 साल बाद भी इंसाफ अधूरा!

DANGAWAS HATYAKAND- डीडवाना का चर्चित डांगावास हत्याकांड में नागौर में SC/ST कोर्ट का फैसला आने के बाद हत्याकांड की पुरानी यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं…मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है…कोर्ट ने सभी 40 आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया है…ऐसे में पीड़ितों द्वारा फैसले पर सवाल उठाए जा रहे हैं….दरअसल कोर्ट ने संदेह के लाभ के आधार पर सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया है…पीड़ितों ने फैसले पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि 6 लोगों की हत्या में किसी को भी सजा न होना सवालिया  निशान लगाता है…इससे पूरे दलित समाज में असुरक्षा और अविश्वास की भावना पैदा हो रही है
क्या था डांगावास हत्याकांड?
डांगावास हत्याकांड के पीछे एक भयावह दास्तान छिपी है जिसे समझने के लिए हमें कुछ साल पीछे जाना होगा…बात साल 2015 की है जब इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा रची गई…डांगावास मेड़ता सिटी क्षेत्र का एक गांव है जहां दलितों की जमीन पर गैर दलितों के कब्जे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था…हत्याकांड जिस जमीन के लेकर हुए विवाद में हुआ वो दरअसल 23 बीघा के करीब थी…जमीन हमेशा से ही सरकारी रिकॉर्ड में दलित मेघवाल परिवार के नाम थी…कब्जेधारी जाट परिवार के अनुसार उन्होंने यह जमीन खरीद ली थी, बस कागजों में दलितों के नाम पर थी। वहीं, दलित परिवार के अनुसार वह जमीन गिरवी रखी गई थी…बात कोर्ट तक पहुंची और आखिरकार फैसला दलित परिवार के पक्ष में दिया गया…यहीं से पूरे विवाद का सिलसिला शुरु हुआ…दलितों को धमकियों को सिलसिला शुरू हुआ जो आगे बढ़ता ही चला गया….11 मई को दलितों ने स्थानीय प्रशासन से सुरक्षा की मांग की…हालांकि प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले से अनजान बने रहे…
14 मई 2015 का खौफनाक सच
 14 मई, 2015 की सुबह विवादित जमीन को लेकर गांव में जाट समुदाय के लोगों के द्वारा अवैध पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हुए…वहां से दलितों को सबक सिखाने के लिए यह उन्मादी भीड़ हरवे-हथियारों से लैस होकर ट्रैक्टर, मोटरसाइकिलों और अन्य वाहनों से विवादित जमीन पर पहुंचे, जहां दलित परिवार अपने रिश्तेदारों के साथ मौजूद थे…सैकड़ों लोगों की भीड़ ने इसके बाद दलितों को निशाना बनाना शुरू कर दिया…उनके साथ मारपीट की गई …लाठी,डंडो, हथियारों से उन पर हमला कर दिया गया…और इसके बाद जो हुआ वो बेहद ही खौफनाक था कई दलितों के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ा दिए गए…जिसमें दो दलितों रतनाराम और पोखरराम की मौके पर ही मौत हो गई बाद में एक दलित पंचाराम ने भी दम तोड़ दिया…इसके बाद गणेशाराम और गणपतराम की मौत अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई… इस तरह 14 मई, 2015 की मॉब लिंचिंग में एक साथ पांच दलितों की हत्या कर दी गई…5 दलितों समेत कुल 6 लोगों की हत्या इस विवाद में हुई थी
11 साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ!
11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट से सभी को उम्मीद थी कि पीड़ितों को न्याय मिलेगा लेकिन कोर्ट का फैसला आने के बाद पीड़ितों के परिजनों और दलित समाज में नाराजगी फैल गई है…भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी और मेघवाल समाज के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम ज्ञापन सौंपा…वहीं पीड़ित दलित मेघवाल समाज बड़े प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है 12 अगस्त को सभी से जयपुर कूच करने को कहा गया और बड़ी संख्या में इकट्ठा होने की बात कही जा रही है….इसी क्रम में दिनांक 12 अगस्त 2026 को शहीद स्मारक, जयपुर में #आक्रोश_प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा…
कोर्ट के फैसले पर गरमाई सियासत
कोर्ट के फैसले के बाद सियासत भी तेज हो गई है., जहां बीजेपी खुलकर पूरे मामले में बोलने से बच रही है तो वहीं कांग्रेस पूरे मामले को लेकर सरकार से सवाल कर रही है, पूर्व सीएम अशोक गहलोत के मुताबिक पीड़ितों को न्याय नहीं मिला है, कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को छोड़े जाना जांच प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है

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