Fifa world cup 2026: फीफा वर्ल्ड कप का बुखार पूरी दुनिया पर चढ़ता जा रहा है। 48 देशों की टीम इसमें हिस्सा ले रही है लेकिन 150 करोड़ की जनसंख्या और दुनिया की 6वीं अर्थव्यवस्था वाला देश भारत का इस टूर्नामेंट में कोई भागीदारी नहीं है. भारत सिर्फ दर्शक दीर्घा में बैठा दिखता है। फुटबॉल विश्वकप की खुमारी भारत में भी देखने को मिलती है लेकिन सिर्फ देखने के लिए इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेना भारत का एक सपना है।
फीफा वर्ल्ड कप में भारतीय मूल के खिलाड़ी
लेकिन भारत टीम की भले ही इस टूर्नामेंट में भागीदारी ना हो लेकिन भारतीय मूल के कुछ खिलाड़ी हैं जो अलग अलग देशों से इस वर्ल्ड कप में खेल रहे हैं . इन खिलाड़ियों पर पूरे भारत की नजर है। बीस साल पहले यानी 2006 में फ्रांस की तरफ से फीफा वर्ल्ड कप में खेलने वाले विकास धोरासू भारतीय मूल के पहले खिलाड़ी थे लेकिन उन्होंने कोई ऐसा कमाल नहीं किया जिससे उनको याद रखा जाये या फिर ये भी कह सकते हैं कि उन्होंने कोई खास प्रदर्शन नहीं किया । लेकिन इस बार चार-चार भारतीय मूल के खिलाड़ी अलग अलग देशों से खेल रहे हैं और हर भारतीय की नजर उनपर रहेगी ।
चार खिलाड़ी भारतीय मूल के
भारत की भागीदारी टीम के रूप में ना सही लेकिन भारतीय मूल के जो खिलाड़ी इस विश्वकप में हिस्सा ले रहे हैं वो सरप्रीत सिंह न्यूजीलैंड से खेल रहे हैं, निशान वेलुपिल्लै ऑस्ट्रेलिया से खेल रहे हैं। कतर की टीम में तहसीन मोहम्मद जमशेद हैं तो डीआर कांगो से सैमुअल मूटूस्सामी हैं ।
सबसे पहले बात करते हैं सरप्रीत सिंह की। सरप्रीत सिंह न्यूजीलैंड टीम में मिडफिल्डर हैं। और वो इस विश्वकप में मैच खेल भी चुके हैं । उनके माता पिता पंजाब से हैं लेकिन अब न्यूजीलैंड में रहते हैं और यहां किराने की दुकान चलाते थे । सरप्रीत सिंह तीन भाई बहन हैं । उनसे एक बड़ा भाई और एक बहन हैं। सरप्रीत सिंह का जन्म न्यूजीलैंड में ही हुआ है।सरप्रीत 16 साल की उम्र में वेलिंगटन फीनिक्स फुटबॉल क्लब से सीनियर टीम में डेब्यू किया था। 2018 में उन्हें भारत आने का मौका मिला । यहां मुंबई में हुए इंटर कॉन्टिनेंटल कप में न्यूजीलैंड की सीनियर राष्ट्रीय टीम से डेब्यू किया । इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 2-1 से हराया था जिसमें सरप्रीत का अहम योगदान था।
एक साल बाद Under-20 वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद सरप्रीत को जर्मनी की शीर्ष फुटबॉल लीग ,बुंडेसलीगा में बायर्न म्यूनिख की ओर से डेब्यू करने का मौका मिला। सरप्रीत बुंडेसलीगा में खेलने वाले पहले भारतीय मूल के खिलाड़ी बने । यहां से सरप्रीत सिंह के करियर को उड़ान मिली। इसके बाद उन्होंने यूरोपीय फुटबॉल लीग के दूसरे क्लबों की ओर से भी खेला। 27 साल की उम्र में सरप्रीत न्यूजीलैंड के लिए 24 इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं । उन्होंने तीन गोल दागे हैं जबकि क्लब फुटबॉल में उनके नाम 34 गोल दर्ज हैं।
निशान वेल्लुपिल्लै,ऑस्ट्रेलिया ,
निशान वेल्लुपिल्लै ऑस्ट्रेलियाई टीम से खेलते हैं। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा हैं। क्लब फुटबॉल में वो मेलबर्न विक्टरी के लिए खेलते हैं। ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय टीम सॉकरूज में वो एक आक्रामक खिलाड़ी के रूप में जाने जाते हैं। इन्होंने 2024 में चीन के खिलाफ डेब्यू किया था। वर्ल्ड कब क्वालिफायर से अपने करियर की शुरूआत की थी। इस मुकाबले में उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय गोल भी किया था। निशान वेल्लुपिल्लै इंटरनेशनल मैच में अबतक तीन गोल कर चुके हैं। निशान वेल्लुपिल्लै की माता एंग्लो-इंडियन और पिता श्रीलंकाई तमिल मूल के मलेशियन हैं ।निशान का जन्म ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में हुआ था ।
सैमुअल मूटुस्सामी,डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो
वर्ल्ड कप में एक और भारतीय खिलाड़ी खेल रहा है। सैमुअल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो टीम का हिस्सा हैं। इनके पिता भारतीय मूल के हैं और कैरेबियाई क्षेत्र ग्वाडेलूप से आते हैं जबकि माता मूल रूप से कांगों की हैं । इनका जन्म फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुआ है।
2019 से सैमुअलग मूटुस्सामी कांगो की तरफ से खेल रहे हैं। वो अबतक 57 इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं । लेकिन इन्होंने गोल का खाता अभी तक नहीं खोला है हालांकी क्लब फुटबॉल में इन्होंने 14 गोल किये हैं।
तहसीन मोहम्मद जमशेद,कतर
कतर की तरफ से खेलने वाले तहसीन मोहम्मद जमशेद अफगानिस्तान के खिलाफ अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेला और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में डेब्यू किया। 20 साल के तहसीन मोहम्मद जमशेद इस साल के वर्ल्ड कप में कतर की ओर से विंगर के रूप में खेल रहे हैं ।
तहसीन के पिता जमशेद केरल के कुन्नूर जिले के रहने वाले हैं और उनकी मां श्यामा वलापट्टनम से हैं । लेकिन 2006 से परिवार कतर में रह रहा है।
तहसीन मोहम्मद ने कतर की एसपायर एकेडमी में ट्रेनिंग ली है और कम उम्र में ही उन्हें अल दुहैल स्पोर्ट्स क्लब से खेलने का मौका मिला गया था। इन्होंने इंटरनेशन फुटबॉल में अफगानिस्तान के खिलाफ 2026 में वर्ल्डकप क्वालिफायर में डेब्यू किया। इनके नाम अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई गोल नहीं है।
भारत के लिए ये भी गर्व की बात है कि भले ही देश की राष्ट्रीय टीम फीफा वर्ल्ड कप में नहीं है लेकिन भारतीय मूल के खिलाड़ी अलग अलग देशों से खेल रहे हैं । ऐसे में हर भारतीय की इन खिलाड़ियों पर नजर रहेगी। ये भारत के लिए भी गर्व की बात है कि भारतीय मूल के लोग विदेशों में देश का नाम रौशन कर रहे हैं ।
