Raipur bulldozer action politics)

रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई पर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज हो गई है.

Raipur bulldozer action politics-रायपुर से लगे नकटी गांव में 77 मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई हुई, जो अब सियासी विवाद का बड़ा मुद्दा बन गया है.

एक तरफ कांग्रेस इसे सरकारी ज्यादती बता रही है, तो वहीं बीजेपी ने पलटवार करते हुए इस कार्रवाई के पीछे कांग्रेस सरकार के पुराने प्रस्ताव को जिम्मेदार ठहराया है.

रायपुर के नकटी गांव (Raipur bulldozer action politics) में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति गर्मा गई है. 29 जून को नकटी गांव में प्रशासन ने 77 मकानों को अवैध कब्जा बताते हुए ध्वस्त कर दिया था. शुरुआत में ये चर्चा तेज हुई कि ये कार्रवाई प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए की गई है. इसके बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया, और 6 विधायकों ने कॉलोनी लेने से इनकार कर दिया. अब कांग्रेस इस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेर रही है.

बीजेपी का दावा है कि नकटी गांव में कार्रवाई किसी नई योजना का हिस्सा नहीं, बल्कि कांग्रेस सरकार के समय 2020 में प्रस्तावित पब्लिक प्रोजेक्ट से जुड़ी प्रक्रिया का परिणाम है. पार्टी का कहना है कि शुरुआत में 3 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित था, जो बढ़कर 15 हेक्टेयर तक पहुंच गया. जहां से अवैध कब्जा हटाया गया.

दरअसल बीजेपी सरकार ने नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई (Buldozer Action)  कर करीब 77 अवैध कब्जे को मुक्त कराया. इस बीच वर्षों से रह रहे लोग बेघर हो गए. कार्रवाई के दौरान लोगों ने जमकर विरोध किया. कितने परिवार आशियाना उजड़ता देख बुलडोजर के सामने तक आ गए. लेकिन पुलिस फोर्स ने उन्हें बलपूर्वक हटाकर अपनी कार्रवाई जारी रखी. अब इसी को कांग्रेस भूना कर राजनीतिक लाभ लेने की फिराक में है. तभी तो कांग्रेस के बड़े नेता प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व सीएम भूपेश बघेल और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव इस मुद्दे को लगातार हवा दे रहे हैं. कांग्रेस ने इस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन भी किया है.

कुल मिलाकर नकटी गांव की बुलडोजर कार्रवाई अब जमीन से निकलकर सीधे सियासत के मैदान में पहुंच गई है. कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राज्यपाल को पत्र लिखकर मिलने का समय माया है. बुलडोजर की इस कार्रवाई में कई घर उजड़ गए. लोगों का सालों का बना बनाया आशियाना तहस-नहस हो गया. इस मुद्दे को कांग्रेस ने दोनों हाथों से लिया है और लगातार इसे लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर है. वहीं बीजेपी इसे अवैध कब्जे को मुक्त करने की कार्रवाई बता रही है. अब देखना ये है कि आने वाले दिनों में ये विवाद कितना बढ़ता है और कौन-सा पक्ष जनता की धारणा पर असर डालता है. ये देखना बेहद ही दिलचस्प होगा.

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