छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है. रायपुर मेडिकल कॉलेज परिसर में 200 सीटर छात्रावास के भूमिपूजन के बाद कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं.
कांग्रेस का आरोप है कि जिस परियोजना का भूमिपूजन सरकार ने किया है, उसकी शुरुआत पिछली सरकार के दौरान हो चुकी थी. वहीं बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस विकास कार्यों पर भी राजनीति कर रही है.
रायपुर के मेडिकल कॉलेज परिसर में 200 सीटर छात्रावास के भूमिपूजन के साथ ही विकास कार्यों को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है(Politics heats up over development works in Chhattisgarh!). पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि इस छात्रावास का भूमि पूजन वर्ष 2021 में ही किया जा चुका था. विपक्ष अब इसको लेकर सत्ता पक्ष पर श्रेय लेने का आरोप लगा रहा है. विपक्ष का आरोप है कि साय सरकार के पास अपनी कोई योजना नहीं है, वो पिछली सरकार की योजनाओं को ही लेकर चल रही है. इन योजनाओं की सूत्रधार बघेल सरकार है. अब हम इन बिंदुओं से कांग्रेस के आरोपों को समझ लेते हैं..
कांग्रेस के आरोप
छात्रावास का पहले भी हो चुका था भूमि पूजन
2021 में टेंडर और ठेकेदार तय होने कादावा
पांच मेडिकल कॉलेज कांग्रेस सरकार में स्वीकृत
पुरानी परियोजनाओं का श्रेय लेने का आरोप
योजनाओं के नाम बदलने का भी आरोप
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है. पिछली सरकार कई परियोजनाओं को सिर्फ कागजों तक सीमित रखकर चली गई थी. जबकि मौजूदा सरकार उन्हें धरातल पर उतार रही है. कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में योजनाएं तो बहुत सारी बनाई, लेकिन उसका ठीक से क्रियान्वयन नहीं किया. जिससे योजना आगे नहीं बढ़ सकी, केवल कागजों तक ही सीमित रह गई. जिसे साय सरकार आगे बढ़ा रही है.
सरकार का जवाब
कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद
विकास कार्यों में तेजी का दावा
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राथमिकता
अधूरे प्रोजेक्ट पूरे कर रही सरकार
विकास पर राजनीति कर रही कांग्रेस
रायपुर मेडिकल कॉलेज छात्रावास का भूमिपूजन अब विकास से ज्यादा राजनीतिक श्रेय की लड़ाई का केंद्र बन गया है. कांग्रेस इसे पुरानी परियोजना बताकर सरकार को घेर रही है. जबकि सरकार अपने कामकाज और विकास की रफ्तार का हवाला देकर विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रही है. ऐसे में सवाल यही है कि जनता विकास के दावों पर भरोसा करेगी या फिर श्रेय की इस सियासी जंग को ही असली मुद्दा मानेगी.
