Chhattisgarh Conversion-छत्तीसगढ़ में फिर बाहर निकला धर्मांतरण का जिन्न

छ्त्तीसगढ़ में फिर बाहर आया धर्मांतरण का जिन्न,नंद कुमार साय के बायन से सूबे की सियासत में उबाल

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण(Chhattisgarh Conversion)को लेकर एक बार फिर राजनीति शुरू हो गई है। नारायणपुर जिले से उठी विवाद की चिंगारी ने अब सूबे की राजनीति में एक बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है।आदिवासियों के बड़े नेता नंद कुमार साय के एक बयान और नारायणपुर के भरंडा गांव में हुई घटना के बाद कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गई हैं।

क्या है भरंडा गांव का पूरा विवाद?

नारायणपुर जिले के भरंडा गांव में पिछले कई दिनों से धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर दो पक्षों के बीच तनाव का माहौल बना हुआ था। जिसके कारण एक बार फिर धर्मांतरण का जिन्न बाहर आ गया है। इस मुद्दे पर राजनीति पर खूब हो रही है। इस बार धर्मांतरण पर सियासी बवाल की वजह एक तस्वीर बनी है। विवाद इतना बढ़ गया कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।प्रशासन की कोशिश के बाद मंगलवार देर रात मामला शांत हो गया। लेकिन छत्तीासगढ़ में आदिवासियों के सबसे बड़े नेता माने जाने वाले नंद कुमार साय ने ऐसा बयान दिया, जिसपर राजनीतिक गलियारे में चर्चा तेज हो गई है…

नंद कुमार साय ने जैसे ही कहा कि ”छत्तीसगढ़ में सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण हो रहा है”. वैसे ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने बीजेपी के साथ नंद कुमार साय पर भी निशाना साधा।बैज ने आरोप लगाया कि ‘’बीजेपी इस संवेदनशील मुद्दे पर सिर्फ राजनीति कर रही है, और समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है।‘’

बैज के आरोपों का डिप्टी सीएम अरुण साव ने दिया करारा जवाब

दीपक बैज ने सरकार पर हमला किया, तो भला सरकार कैसे चुप्पी साधे रह सकती थी।लिहाजा सूबे के डिप्टी सीएम अरुण साव ने मोर्चा संभाला।उन्होंने और कहा कि” कांग्रेस के राज में खुलेआम धर्मांतरण हो रहा था. बीजेपी की सरकार इसे रोकने के लिए सख्त कानून लेकर आई है। और प्रदेश में किसी भी प्रकार के अवैध और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए सरकार हर संभव और कड़े प्रयास कर रही है।”

धर्मांतरण मुद्दे का स्थाई समाधान कब?

छत्तीसगढ़ की सियासत में अवैध धर्मांतरण का मुद्दा नया नहीं है। यह लंबे वक्त से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव का केंद्र रहा है।बस्तर और नारायणपुर जैसे आदिवासी बाहुल्य इलाकों में यह मुद्दा जमीनी स्तर पर बेहद संवेदनशील है।

अब देखना यह होगा कि, नारायणपुर में बढ़े इस ताजा तनाव और राजनीतिक बयानबाजी के बीच, क्या राज्य सरकार का लाया गया सख्त कानून इस समस्या का कोई स्थाई और शांतिपूर्ण समाधान निकाल पाता है, या यह मुद्दा आगामी दिनों में और तूल पकड़ेगा।

 

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