Samuh Sakhi Protest:उत्तर प्रदेश की योगी सरकार मिशन शक्ति को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है।नारी शक्ति को लेकर अखबार के बड़े-बड़े पन्नों को विज्ञापनों से भर देती है।सड़कों को नारी शक्ति के होर्डिंग्स से पाट देती है। लेकिन दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। बलरामपुर से ऐसे ही दावों की धज्जियां उड़ाती एक खबर सामने आई है।मोदी-योगी की डबल इंजन सरकार में किस कदर आधी आबादी को हाशिये पर धकेला जा रहा है, बलरामपुर की सखी दीदी इसका जीता जागता उदाहरण है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांव-गांव जाकर सरकार की योजनाओं का प्रचार करने वाली,उनकी योजनाओं को जमीन पर उतारने वाली ‘समूह सखी’ का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा।सिस्टम की बेरुखी और आर्थिक शोषण से परेशान होकर सैकड़ों की संख्या में ‘समूह सखी’ ने जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया,और यूपी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बढ़ती महंगाई में केवल दो हजार,वो भी महींनों गायब!
प्रदर्शन कर रही ‘समूह सखी’ का सीधा सवाल था कि,आज के समय में जब महंगाई दिन दोगुनी और रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रही है।ऐसे में हमें केवल दो हजार रुपये देना कहां तक जायज है?आखिर मात्र 2000रुपये से किसी का खर्च कैसे चल सकता है?ग्राम्य विकास विभाग के तहत प्रशिक्षण हासिल करने के बाद,इन ‘समूह सखी’ को सरकार की हर छोटी से बड़ी योजना को जमीन यानि धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी दी जाती है।जिसका ये बखूबी निर्वहन भी करती हैं। सरकार की हर योजना को गांव-गांव तक पहुंचाकर ये प्रशासन का काम आसान भी करती हैं।बावजूद इसके इनकी आर्थिक हालत बद से बदत्तर होती जा रही है।जबकि सरकार के कागज पर नारी शक्ति विकास के पायदान पर पहुंच रही है।
आज के वक्त जब एक दिहाड़ी मजदूर भी रोज 400 से 500 रुपये मांगता है,ऐसे में इन ‘समूह सखी’ को केवल दो हजार का मानदेय कहां तक सही है?आलम ये है कि,ये इस मामूली रकम के लिए भी ‘समूह सखी’ को महीनों इंतजार करना पड़ता है। ‘समूह सखी’ का आरोप है कि,उनका मानदेय छह महीने से लेकर साल भर तक लटका रहता है।ऐसे में सवाल उठता है कि,जो सरकार महिला सुरक्षा और स्वावलंबन का डंका बजाती है,वो ऐसे मामलों में क्या कर रही है? क्यों उसे सखी दीदी की पीड़ा नहीं सुनाई दे रही है?
काम सरकार का,संसाधन हमारा
आंदोलन कर रही ‘समूह सखी’ ने बताया कि,उनके ज्यादातर काम ऑनलाइन तरीके से कराए जाते हैं।लेकिन सरकार की तरफ से उन्हें इसके लिए कोई सुविधा या संसाधन नहीं दिया जाता है।मसलन ऑनलाइन तरीके से काम कराने के लिए ना तो उन्हें मोबाइल फोन दिया जाता है,और ना ही रिचार्ज की कोई सुविधा।यहां तक की गांव-गांव जाने और वहां दौड़ भाग करने का टीए भी नहीं दिया जाता।
यानि कुल मिलाकर कहा जाए,तो सरकार का काम करने वाली ‘समूह सखी’ की छोटी सी कमाई पर बड़ा बोझ डाल दिया जाता है। इसी के चलते ‘समूह सखी’ का गुस्सा फूट पड़ा,और उन्होंने कलेक्ट्रेट में जाकर मोर्चा खोल दिया..’समूह सखी’ ने मांग की, कि उन्हें सम्मानजनक मानदेय दिया जाए,और दो हजार की राशि को बढ़ाकर 15,224 रुपये महीना किया जाए।
हर महीने का मानदेय बिना किसी देरी के सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की जाए।
ऑनलाइन कार्यों के लिए मुफ्त स्मार्टफोन और डेटा की सुविधा दी जाए।
आजीविका मिशन के तहत काम करने वाली सभी समूह सखियों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
सखी दीदी की योगी सरकार को चेतावनी
अपनी मांग को लेकर ‘समूह सखी’ की बलरामपुर से उठी ये चिंगारी अब सूबे में आग बनने को तैयार है। आंदोलन करने वाली ‘समूह सखी’ने चेतावनी दी है कि,अगर उनकी मांगे तत्काल नहीं मानी गई,और उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो वो अपने आंदोलन को और तेज करेंगी। और आने वाले वक्त में इसे ब्लॉक स्तर से लेकर राजधानी लखनऊ तक लेकर जाएंगी।
संवाददाता
राहुल शुक्ला,बलरामपुर
