Raga Megh for Rain in Kashi-काशी में बारिश के लिए विशेष अनुष्ठान

वाराणसी में बारिश कराने के लिए विशेष अनुष्ठान,भगवान इंद्र की बरसी कृपा!

वाराणसी,Varanasi Raga Megh for rain। धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी इन दिनों भीषण उमस और झुलसा देने वाली गर्मी से जूझ रही है।आलम ये है कि,भगवान भास्कर के कोप से आमजन के साथ जीव-जंतु भी त्राहिमाम कर रहे हैं। आमजन को सूर्यदेव के इस कोप से बचाने के लिए गंगा तट पर एक अनूठा धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान आयोजित किया गया।प्रसिद्ध तुलसी घाट पर भगवान इंद्र को प्रसन्न करने और धरती मां को शीतलता प्रदान करने के ध्येय से मां गंगा के आंचल में राग मेघ की मनमोहक स्वर लहरियां बिखेरी गई।प्रसिद्ध शहनाई वादक महेंद्र प्रसन्ना ने बारिश के देवता भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए अपनी मधुर शहनाई से राग मेघ का अलाप छेड़ा।

गंगा तट पर मेघ मल्हार से मंत्रमुग्ध हुए काशीवासी

घाटों पर सुबह के शांत और मनोरम वातावरण जब शहनाई से राघ मेघ के स्वर फूटे,तो पूरे वातावरण मानों एक आध्यात्मिक ऊर्जा भर उठा।ऐसी मान्यता है कि, भारतीय शास्त्रीय संगीत का हमारे प्रकृति से खास संबंध है।खासकर राघ मेघ और मल्हार का।राघ मेघ और मल्हार वर्षा ऋतु के प्रतीक माने जाते हैं।ऐसा कहा जाता है कि,पुरातन काल में राघ मेघ और मल्हार का आह्वान बारिश कराने के लिए किया जाता था।

तुलसी घाट पर भी इन रागों के जरिये जब शहनाई वादक महेंद्र प्रसन्ना ने अपना सुर छेड़ा,तो घाट पर मौजूद सभी लोग भावविभोर हो उठे।घाट पर मौजूद सभी लोगों ने इस पल को केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति के रूप में नहीं,बल्कि प्रकृति और देवताओं के लिए की जाने वाली एक प्रार्थना के रूप में अनुभव किया।

भगवान इंद्र से बारिश और जनकल्याण की कामना

इस खास सांस्कृतिक और धार्मिक अनुष्ठान का मकसद केवल तपती धरती को बारिश के जरिये शांत करना नहीं,बल्कि पूरी काशी को सुख-समृद्ध करना था। दरअसल पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी और उमस ने काशी के लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।जिससे मुक्ति पाने के लिए इस अनुष्ठान का आयोजन किया गया।

इस अनुष्ठान का ही फल था कि, शाम होते-होते मौसम ने करवट ली,और बारिश की फुहारों ने मौसम को सुहाना बना दिया।

अनुष्ठान का आयोजन कराने वालों का कहना था कि,हमारी यानि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को देवता के रूप में ही पूजा जाता है।और बारिश को जीवन का आधार माना जाता है।क्योंकि अच्छी बारिश जहां धरा को शीतलता प्रदान करती है,वहीं किसानों और आजमन को भी बड़ी राहत देती है।पर्यावरण के लिहाज से भी बारिश को बहुत जरूरी माना गया है।इसी कामना के साथ इंद्रदेव से बारिश कराने की प्रार्थना की गई।

संवाददाता

सतीश नंदा,वाराणसी

 

 

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