mangarh-dham

मानगढ़ धाम पर सियासी संग्राम

mangarh-dham- गुजरात की सीमा पर स्थित राजस्थान का मानगढ़ धाम, जिसे राजस्थान का जलियांवाला बाग भी कहा जाता है, राष्ट्रीय स्मारक नहीं बनेगा। इसका प्रमुख कारण यह है कि धाम पर हुए आधुनिक निर्माण कार्य राष्ट्रीय स्मारक बनने की राह में बाधा बन गए हैं। नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल की ओर से लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सदन में बताया कि केंद्र सरकार का मानना है कि मानगढ़ धाम राष्ट्रीय स्मारक घोषित किए जाने योग्य नहीं है। इसलिए इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है।
संसद में सरकार का जवाब
शेखावत के जवाब के मुताबिक प्राचीन स्मारक और पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के प्रावधानों के तहत राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में घोषित करने के लिए यह सबसे आवश्यक है कि वहां पुरातात्विक विशेषताओं, प्रामाणिकता और अखंडता को बनाए रखा जाए। यहां ऐसा नहीं है। बांसवाड़ा का मानगढ़ धाम प्राचीन स्मारक, पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्व के स्मारक या स्थल के रूप में घोषित होने के योग्य नहीं है।
मानगढ़ धाम का इतिहास ?
जलियांवाला बाग से भी बड़ा था हत्याकांड
अंग्रेजों ने मानगढ़ पर हत्याकांड को अंजाम दिया
17 नवंबर 1913 को मेले का आयोजन होना था
अंग्रेजों ने मानगढ़ धाम को चारों ओर से घेर लिया
मेले में मौजूद हजारों वनवासियों पर गोलियां बरसाई
हमले में पंद्रह सौ से ज्यादा वनवासी शहीद हो गए
वनवासियों के नेता गोविन्द गुरु को हिरासत में लिया
अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई
बाद में फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदला
सजा काटने के बाद गोविन्द गुरु 1923 में रिहा हुए
भील सेवा सदन के माध्यम से लोक सेवा में लगे रहे
30 अक्टूबर 1931 में मानगढ़ में अंतिम संस्कार किया
मानगढ़ धाम में ही उनकी समाधि बनाई गई
समाधि पर हर साल वनवासी आदिवासी आते हैं
भील समाज उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करता है
केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में बताया कि मानगढ़ धाम स्थल का सर्वे किया गया था। सर्वे में पाया गया कि यहां बड़े पैमाने पर आधुनिक निर्माण कार्य हुए हैं। आधुनिक बदलाव के कारण मानगढ़ धाम अपनी पुरातात्विक विशेषताओं, अखंडता और प्रमाणिकता को बनाए नहीं रखता है। प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के प्रावधानों को मानगढ़ धाम पूरा नहीं करता है। उल्लेखनीय है कि मानगढ़ धाम पर पैनोरमा बनाने के साथ ही वृहद स्तर पर निर्माण कार्य हुए हैं। लेकिन केंद्र सरकार के इस बयान के बाद राजस्थान में आदिवासी अस्मिता की जंग तेज हो गई है…इसमें सबसे पहले मोर्चा पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने खोला उन्होंने कहा कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारकर का दर्जा मिलना ही चाहिए…और केंद्र सरकार इस पर फैसला न लेकर आदिवासियों के साथ धोखा कर रही है…वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि ये आदिवासियों के साथ केंद्र की बीजेपी सरकार का सबसे बड़ा धोखा है…वहीं भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने भी फैसले को लेकर नाराजगी जताई है….रोत ने कहा कि ये भील आदिवासियों के बलिदान का अपमान है
कुल मिलाकर मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर नया सियासी मोर्चा खुल गया है..अब देखना होगा कि केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार इस पर क्या फैसला लेती है…क्योंकि निकाय और पंचायत चुनावों से पहले उठे इस मुद्दे ने बीजेपी को बैकफुट पर तो धकेल ही दिया है…और सरकार आदिवासी वोट बैेंक से हाथ नहीं धोना चाहेगी

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