Jitu Patwari-ट्रांसफर नीति को लेकर जीतू पटवारी हमलावर

Congress state president Jitu Patwari has allegations against the government.

तबादला नीति को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रदेश ने Jitu Patwari ने मोहन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पटवारियों की ट्रांसफर लिस्ट बदलने को लेकर सियासी भूचाल आ गया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari ने सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए इसे ‘तबादला उद्योग’ करार दिया है और 200 करोड़ रुपये के लेन-देन का दावा किया है. वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे कर्मचारियों का अपमान बताया है..

Jitu Patwarit का सरकार पर हमला

मध्य प्रदेश में तबादलों का मौसम आते ही भ्रष्टाचार के आरोपों की तपिश बढ़ गई है। भोपाल में हाल ही में जारी हुई पटवारियों की ट्रांसफर लिस्ट में हुए बदलावों को लेकर कांग्रेस ने मोहन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सीधे तौर पर सरकार को घेरते हुए इसे प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘उद्योग’ बताया है। जीतू पटवारी ने आरोपों की झड़ी लगाते हुए दावा किया कि इस पूरी लिस्ट को बदलने के पीछे करोड़ों का खेल हुआ है। इतना ही नहीं, उन्होंने इस मामले में एक अनोखी मांग भी रख दी है।

पटवारी के इस ‘स्टिंग ऑपरेशन’ और ‘200 करोड़’ वाले दावों पर सियासत उबल पड़ी। सरकार की तरफ से मोर्चा संभालते हुए कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस अध्यक्ष पर तीखा पलटवार किया। सारंग ने कहा कि कांग्रेस के पास कोई काम नहीं बचा है, इसलिए वह सिर्फ सनसनी फैला रही है.. साथ ही सारंग ने कांग्रेस पर कर्मचारियों और अधिकारियों का अपमान करने का आरोप लगाया है।

दरअसल राजधानी भोपाल में पटवारियों के तबादलों की लिस्ट सिर्फ़ 24 घंटे में ही बदल गई। इससे प्रशासनिक निर्णय पर सवाल खड़े हो गए हैं। 15 जून को जारी स्थानांतरण आदेश में जिन पटवारियों को वर्षों से एक ही तहसील में पदस्थ रहने के कारण हटाया गया था, उनमें से आधे से अधिक को अगले ही दिन राहत मिल गई। महज 24 घंटे के भीतर जारी संशोधित सूची में 46 में से 24 पटवारियों के नाम हटा दिए गए, जिससे तबादले निरस्त हो गए।

प्रशासनिक तबादले हर सरकार का रूटीन काम होते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में पटवारियों की इस लिस्ट ने एक बड़ा सियासी रूप ले लिया है। कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए सरकार को घेरकर बैकफुट पर लाना चाहती है, तो वहीं भाजपा इसे कर्मचारियों के स्वाभिमान से जोड़कर कांग्रेस को ही कटघरे में खड़ा कर रही है। अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस अपने इन दावों के पक्ष में कोई सबूत पेश कर पाते हैं, या यह मामला सिर्फ सियासी बयानों तक ही सिमट कर रह जाएगा। साथ ही तबादलों पर शुरू हुई यह जंग अब सीधे-सीधे साख की लड़ाई बन चुकी है। देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस ‘200 करोड़’ के आरोप को सड़क से सदन तक कितना खींच पाती है।

 

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