SHRI GANGESHWAR SANSKRIT VIDYALAY

96 वर्षों से संस्कृत और सनातन संस्कृति की अलख जगा रहा है “श्री गंगेश्वर संस्कृत विद्यालय”

आधुनिक शिक्षा के साथ वेद, पुराण, व्याकरण, कर्मकांड एवं भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम; 100 से अधिक छात्र छात्रावास में रहकर कर रहे हैं अध्ययन

((SHRI GANGESHWAR SANSKRIT VIDYALAY))

शिकोहाबाद: शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण और पाश्चात्य प्रभाव के इस दौर में शिकोहाबाद स्थित श्री गंगेश्वर संस्कृत उत्तर माध्यमिक विद्यालय आज भी भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत भाषा और सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। वर्ष 1930 में स्थापित यह संस्थान लगभग 96 वर्षों से निरंतर समाज को संस्कारित, शिक्षित और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक प्रदान कर रहा है।


उत्तर प्रदेश संस्कृत शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त यह विद्यालय प्रथम स्तर से लेकर उत्तर मध्यमा स्तर तक संचालित होता है। यहां विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत भारतीय ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा भी प्रदान की जाती है। विद्यालय में हिन्दी, अंग्रेजी, गणित विज्ञान, सामाजिक विज्ञान जैसे आधुनिक विषयों के साथ-साथ सनातनी परंपरा के परंपरागत विषय संस्कृत साहित्य, संस्कृत व्याकरण, वेद, पुराण, इतिहास पुराण एवं संस्कृति, कर्मकांड, पौरोहित्य, चित्रकला जैसे विषयों का अध्ययन भी कराया जाता है।

आवासीय शिक्षा से बेहतर बन रहा छात्रों का भविष्य((SHRI GANGESHWAR SANSKRIT VIDYALAY))

विद्यालय की सबसे बड़ी विशेषता इसका आवासीय शिक्षण वातावरण है। वर्तमान में यहां 141 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 100 से अधिक छात्र छात्रावास में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। छात्रावास व्यवस्था विद्यार्थियों को अनुशासित, संस्कारित एवं आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करती है, जिससे उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास संभव हो पाता है।


इस महान संस्थान की स्थापना धर्मनिष्ठ तपस्वी एवं विद्वान संत श्री श्री 108 पुरुषोत्तमाश्रम जी महाराज द्वारा की गई थी। दक्षिण भारत के मूल निवासी स्वामी जी ने अपने जीवनकाल में चार बार सम्पूर्ण भारत की पदयात्रा कर परिक्रमा की थी। बताया जाता है कि उन्हें चारों वेद, महाभारत तथा अठारहों पुराण कंठस्थ थे। उनका जीवन भारतीय संस्कृति, तप, त्याग और ज्ञान का अद्भुत उदाहरण माना जाता है।


स्वामी पुरुषोत्तमाश्रम जी महाराज का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं था, बल्कि ऐसे संस्कारित युवाओं का निर्माण करना था जो भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संवाहक बन सकें। यही कारण है कि स्थापना के लगभग एक शताब्दी बाद भी यह विद्यालय अपने मूल उद्देश्यों पर दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है।

संस्कृत के साथ आधुनिक शिक्षा का समन्वय जरूरी

विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि आधुनिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के साथ यदि भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों का समन्वय किया जाए तो विद्यार्थियों का समग्र विकास संभव है। यही समन्वित शिक्षा प्रणाली श्री गंगेश्वर संस्कृत उत्तर माध्यमिक विद्यालय की पहचान बन चुकी है।
वर्तमान समय में जब संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है, तब शिकोहाबाद का यह संस्थान न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का एक सशक्त अभियान भी है।

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