नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान के लिए Two-State Solution यानी दो-राष्ट्र समाधान को जरूरी बताया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दिए बयान को फिलिस्तीन मिशन ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया है। जयशंकर ने कहा कि मध्य पूर्व में टिकाऊ और स्थायी शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान जरूरी है।
फिलिस्तीन मिशन ने साझा किया जयशंकर का वीडियो
फिलिस्तीन मिशन ने जयशंकर के UNGA संबोधन का वीडियो क्लिप साझा करते हुए उनके बयान को प्रमुखता दी। जयशंकर ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हिंसा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत का स्पष्ट मानना है कि टिकाऊ और स्थायी शांति के लिए Two-State Solution जरूरी है। उन्होंने साथ ही बताया कि भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत प्रयासों में योगदान दे रहा है।
भारत का लंबे समय से दो-राष्ट्र समाधान पर रुख
भारत लंबे समय से बातचीत के जरिए ऐसे समाधान का समर्थन करता रहा है, जिसमें एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इजरायल के साथ शांतिपूर्वक अस्तित्व में रहे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत फिलिस्तीन के आत्मनिर्णय के अधिकार और दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता रहा है। भारत फिलिस्तीन की संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता की दावेदारी का भी समर्थन करता है। जुलाई 2026 में भारत ने फिलिस्तीन के लिए अतिरिक्त मानवीय सहायता और स्वास्थ्य एवं कौशल विकास से जुड़ी परियोजनाओं की घोषणा भी की थी।
7 अक्टूबर के हमले की भी कर चुका है निंदा
भारत ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए हमास के हमले की निंदा की है। साथ ही भारत ने इजरायल-हमास संघर्ष में नागरिकों की मौत पर भी चिंता जताई है। भारत का आधिकारिक रुख बातचीत के जरिए समाधान और क्षेत्र में शांति स्थापित करने पर केंद्रित रहा है।
यूक्रेन युद्ध का भी जयशंकर ने किया जिक्र
UNGA में जयशंकर ने यूक्रेन संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लगातार चलने वाले युद्ध को समाप्त करने की जरूरत है और भारत शांति स्थापित करने की मौजूदा पहलों का समर्थन करता है। उन्होंने खाद्यान्न और ऊर्जा सुरक्षा के साथ समुद्री परिवहन से जुड़े लोगों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। जयशंकर ने कहा कि भारत इन परिस्थितियों को बेहतर बनाने और खासकर खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा के मामले में हर संभव मदद करने को तैयार है।
शांति सिर्फ युद्ध की अनुपस्थिति नहीं
जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि शांति का मतलब केवल युद्ध का न होना नहीं है। उनके मुताबिक दुनिया में लगातार खतरे और दबाव बने रहने से अस्थिरता बढ़ती है। इसलिए स्थिरता, सुरक्षा और पूर्वानुमेयता को मजबूत करना जरूरी है। भारत का कहना है कि इन तत्वों को कमजोर करने से शांति भी कमजोर होती है। इसी व्यापक संदर्भ में भारत ने पश्चिम एशिया के लिए Two-State Solution को टिकाऊ शांति की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बताया है।
