छत्तीसगढ़ की सियासत में अचानक हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 18 जून की देर रात आपात बैठक की.
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छत्तीसगढ़ की सियासत में अचानक हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 18 जून की देर रात आपात बैठक की. मंत्रिमंडल के सदस्यों के अलावा इस बैठक में बीजेपी संगठन के आला पदाधिकारी भी मौजूद रहे. करीब 4 घंटे चली इस बैठक के बाद अटकलों का बाजार गर्म है… सवाल ये है कि क्या सरकार के भीतर सब कुछ ठीक है या बड़ा बदलाव होने वाला है.
छत्तीसगढ़ में 18 जून की देर रात सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई… जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अचानक मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुला ली… रात करीब 9:30 बजे के बाद शुरू हुई ये बैठक, देर रात 1:30 बजे तक चली. छत्तीसगढ़ शासन के मुताबिक ये कोई आपात बैठक नहीं थी, मोदी जी के 12 साल के कार्यकाल पर सबको अलग-अलग कार्य सोपा गया था उसकी समीक्षा की गई है. ये एक सामान्य बैठक थी.
सूत्रों के मुताबिक बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन साथ ही ये अटकलें भी तेज हो गईं कि मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव हो सकता है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है. करीब 4 घंटे चली इस लंबी बैठक ने कई सवाल खड़े कर दिए…अटकलों के बाजार को गर्म करने वाली इस बैठक को बाद में सामान्य करार देने की कोशिश की गई. इस बात पर प्रतिक्रिया देते हुए डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि ये एक रूटीन बैठक थी. इसमें सरकार के कामकाज की समीक्षा की गई है. संगठन और सत्ता के बीच सामंजस्य बनाकर बेहतर काम करने पर चर्चा हुई. किसी भी तरह के बदलाव की बात सही नहीं है. पता नहीं ये बात कहां से चर्चा में आई.
आनन फानन में हुई इस बैठक पर सरकार के भले ही अपने तर्क हों, लेकिन विपक्षी दल कांग्रेस को सरकार का ये तर्क हजम नहीं हो रहा. कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार के अंदरूनी हालात ठीक नहीं हैं. छत्तीसगढ़ सरकार और बीजेपी में अंतर्द्वंद चल रहा है. लगभग 15 दिन से यह चर्चा चल रही थी कि मंत्रियों के प्रभार बदले जाएंगे मंत्रिमंडल में सामूहिक इस्तीफा होगा. इस चर्चा के बीच मंत्रियों ने मुख्यमंत्री ही बदलने का दबाव बना दिया. इसके बाद आनन फानन में मुख्यमंत्री को अपने निवास में बैठक बुलानी पड़ी.
एक तरफ सरकार इसे सामान्य बैठक बता रही है तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे अंदरूनी संकट का संकेत मान रहा है, अब सवाल ये है कि आखिर देर रात बुलाई गई इस बैठक के पीछे असली वजह क्या थी? सरकार भले ही इसे रूटीन बता रही हो, लेकिन जिस तरह से बैठक का समय रहा, उसने सियासी अटकलों को नई हवा दे दी है..
