BSF Border Security: गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है। BSF के महानिदेशक प्रवीण कुमार ने गुजरात फ्रंटियर मुख्यालय, गांधीनगर में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा, ऑपरेशनल तैयारियों और बॉर्डर मैनेजमेंट की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी, इंटेलिजेंस और मानव संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के जरिए बॉर्डर डोमिनेशन बढ़ाने के निर्देश दिए।
अधिकारियों के मुताबिक, बैठक में गृह मंत्रालय के हालिया निर्देशों के अनुरूप मजबूत बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड तैयार करने, सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर, घुसपैठ रोधी उपायों, सीमा पार तस्करी और उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंस पर रहेगा फोकस
BSF DG ने निर्देश दिया कि पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मानव संसाधन, आधुनिक तकनीक और खुफिया जानकारी का प्रभावी इस्तेमाल किया जाए। साथ ही BSF की अन्य सुरक्षा एजेंसियों, बलों और स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया गयासरकार की ओर से हाल के महीनों में स्मार्ट बॉर्डर और एकीकृत सुरक्षा ग्रिड पर लगातार जोर दिया गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, सीमा सुरक्षा को अलग-अलग चौकियों तक सीमित रखने के बजाय एकीकृत सुरक्षा ग्रिड की दिशा में काम किया जा रहा है। इसमें तकनीक, स्थानीय प्रशासन, सीमा सुरक्षा बलों और सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना गया है।
पाकिस्तान सीमा पर 2,289 किलोमीटर से ज्यादा जिम्मेदारी
चंडीगढ़ मुख्यालय वाला BSF का वेस्टर्न कमांड जम्मू, कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात फ्रंटियर के जरिए भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा संभालता है। इस पूरे पश्चिमी थिएटर में करीब 2,289.66 किलोमीटर सीमा की सुरक्षा BSF के जिम्मे है। इस क्षेत्र में घुसपैठ के प्रयासों के अलावा सीमा पार से होने वाली तस्करी, ड्रोन के जरिए सामान या हथियार पहुंचाने की कोशिश और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियां भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम हैं।
ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क पर भी शिकंजा
BSF DG ने 2029 तक नशामुक्त भारत के सरकार के लक्ष्य का जिक्र करते हुए सीमा पार से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को बाधित और ध्वस्त करने के लिए लगातार और समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया। गृह मंत्रालय ने भी सीमा सुरक्षा के व्यापक ढांचे में नारकोटिक्स तस्करी, हथियारों की तस्करी, ड्रोन से जुड़े खतरे और घुसपैठ को प्रमुख चुनौतियों में शामिल किया है।
ओखा में कोस्टल पुलिसिंग की भी समीक्षा
BSF महानिदेशक ने गुजरात के ओखा स्थित National Academy of Coastal Policing (NACP) का भी दौरा किया। उन्होंने वहां चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और प्रशिक्षकों व कर्मचारियों की उपलब्धता की समीक्षा की।
अमित शाह पहले ही दे चुके हैं ‘Quadrangular Security Grid’ पर जोर
सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जुलाई 2026 में Land Border Districts’ Superintendents of Police Conference में Quadrangular Security Grid की बात कही थी। इसमें सीमा सुरक्षा बलों के साथ राज्य और जिला प्रशासन, केंद्र सरकार की संबंधित एजेंसियों और सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय नागरिकों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया था।
सरकार ने इसी दिशा में पारंपरिक अलग-अलग बॉर्डर आउटपोस्ट व्यवस्था से आगे बढ़कर Integrated Security Grid विकसित करने की बात कही है। मई 2026 में गृह मंत्रालय ने स्मार्ट बॉर्डर के तहत ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरों और अन्य तकनीकों के इस्तेमाल से सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की योजना भी बताई थी।
सीमा सुरक्षा में स्मार्ट तकनीक का बढ़ रहा इस्तेमाल
गृह मंत्रालय के मुताबिक, सीमा सुरक्षा के लिए स्मार्ट फेंसिंग, सेंसर, ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों को सुरक्षा तंत्र में शामिल किया जा रहा है। जुलाई में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में गृह मंत्री ने रेडियो आधारित फेंस-ब्रीच डिटेक्शन सिस्टम और इंफ्रारेड अलार्म सिस्टम जैसी तकनीकों का भी निरीक्षण किया था। पश्चिमी सीमा पर BSF की ताजा समीक्षा और निर्देश ऐसे समय में आए हैं, जब सरकार सीमा सुरक्षा को तकनीक, खुफिया जानकारी, इंफ्रास्ट्रक्चर और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय पर आधारित एकीकृत व्यवस्था में बदलने पर जोर दे रही है।
