Prabal Pratap Singh Removed-सपा ने कन्नौज विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह को पद से हटा दिया है।

समाजवादी पार्टी में ‘कुर्सी कांड’! अखिलेश से मुलाकात के बाद चली गई प्रबल प्रताप की कुर्सी…

Prabal Pratap Singh Removed-बड़े बेआबरु होकर तेर कूचे से हम निकले…जी हां,यही कह रहे हैं कन्नौज से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष,प्रबल प्रताप सिंह बघेल।पार्टी ने उन्हें पद मुक्त कर दिया है,जिसके बाद सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म है।कहां तो प्रबल अखिलेश से मुलाकात करने गए थे। और कहां मुलाकात के बाद पद से ही पत्ता साफ हो गया।ये बात किसी के गले नहीं उतर रही है।सियासी गलियारों में अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि,आखिर अखिलेश से मुलाकात में ऐसा क्या हो गया कि,प्रबल को पद से ही हटा दिया गया। वो भी तत्काल प्रभाव से।

पदमुक्त करने का पत्र आते ही ‘डिजिटल पंचायत’ शुरू

जैसे ही जिला अध्यक्ष कलीम खान ने प्रबल प्रताप को कार्य मुक्त किये जाने का लेटर जारी किया,वैसे ही सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर समाजवादियों ने अपनी-अपनी अदालतें लगा दी। कोई फेसबुक पर कुछ लिख रहा है,तो कोई इंस्टाग्राम पर।कुछ लोग तो व्हाट्सअप पर ही कानाफुसी कर रहे हैं।प्रबल प्रताप पर हुई कार्रवाई को लेकर अपनी कहानी गढ़ रहे हैं।कोई इस फैसले को संगठन की मजबूती से जोड़ रहा है,तो कोई इसकी राजनीतिक परते खोलने की कोशिश कर रहा है।

जहां एक धड़ा इस फैसले को पार्टी का अनुशासित कदम बताकर स्वागत कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे गलत ठहराते हुए नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठा रहा है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच समर्थक और विरोधी आमने-सामने हैं।

समाजवादी पार्टी के कई कार्यकर्ता अब पूरे मुद्दे पर पार्टी को फजीहत से बचाने की कवायद में जुट गए हैं।और लोगों को ये समझा रहे हैं कि,पार्टी हित सबसे ऊपर है।हालांकि बावजूद इसके कुछ लोग ये पूछते नजर आ रहे हैं कि,आखिरकार विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष ने ऐसी कौन सी गलती कर दी कि,चुनाव से पहले ही उन्हें पद से हटा दिया गया।कुल मिलाकर कहा जाए,तो समाजवादी पार्टी का ये मामला अब सार्वजनिक बहस का मुद्दा बन चुका है।

कुर्सी खाली होते ही उम्मीदवारों के खिले चेहरे

कहा जाता है कि,सियासत में खाली कुर्सी सबके निगाह में गड़ी रहती है..यह सबके आकर्षण का केंद्र रहता है।कुछ ऐसा ही नजारा कन्नौज में प्रबल प्रताप के पद से हटते ही दिखाई पड़ रहा है।कन्नौज की सियासी फिजा में अचानक कुछ नए चेहरे तैरने लगे हैं। जो नेता अब तक संगठन में अपने तलवे घीस रहे थे।वेटिंग लिस्ट में लाइन लगाकर अपनी बारी की प्रतिक्षा कर रहे थे। प्रबल प्रताप के हटने के बाद उन्हें अब उम्मीद की नई किरण दिखाई पड़ रही है।

उधर, प्रबल समर्थकों के चेहरे उदास हैं। उन्हें लगता है कि चुनावी साल के बीच यह फैसला ठीक नहीं है,और इसका नुकसान पार्टी को हो सकता है।हालांकि जिला इकाई इसे सामान्य संगठनात्म प्रक्रिया बता रही है।

पद से हटाए जाने के बाद भी समाजवादी हूं

पद से हटाए जाने के बाद प्रबल प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर एक सधे हुए सियासतदान की तरह संतुलित बयान दिया।उन्होंने अपनी पोस्ट पर लिखा-

‘’पद आते हैं और जाते हैं, लेकिन हम समाजवादी पार्टी के सिपाही थे और रहेंगे। हम अखिलेशवादी हैं और हमेशा रहेंगे। जो लोग हमारे हटने पर जश्न मना रहे हैं, उन्हें भी धन्यवाद और जो हमारे साथ खड़े हैं, उनका भी आभार।‘’

​सत्ता पक्ष ने लिए चुटकी, चर्चाओं का दौर तेज

​सपा के इस आंतरिक बदलाव पर सत्ता पक्ष के लोग भी टिप्पणी करने से नहीं चूक रहे हैं। सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कयास यह लगाए जा रहे हैं कि अब सपा किसी ब्राह्मण चेहरे को कन्नौज सदर का विधानसभा अध्यक्ष बनाकर समीकरण साधेगी, तो कुछ लोग इसे क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधित्व से जोड़कर देख रहे हैं।

​फिलहाल, इस कार्रवाई ने कन्नौज की राजनीति में नए सिरे से मंथन शुरू कर दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस फेरबदल के जरिए क्या नया ‘सोशल इंजीनियरिंग’ फॉर्मूला लागू करने जा रही है।

खाली कुर्सी पर अब कौन बैठेगा?

कन्नौज में अब इस बात की चर्चा हर तरफ हो रही है कि,खाली कुर्सी पर अखिलेश किसे बैठाएंगे।सियासी पंडितों का कहना है कि,आगामी चुनाव को देखते हुए पार्टी किसी ब्राह्मण चेहरे को मौका दे सकती है।जबकि कुछ लोग इसे क्षत्रिय प्रतिनिधित्व के नजरिये से देख रहे हैं।

इधर चर्चा ये भी है कि,समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनाव से पहले बूथ से लेकर विधानसभा स्तर तक पूरे संगठन में बदलाव कर सकती है,और प्रबल प्रताप को हटाया जाना,इसी कड़ी का हिस्सा है।फिलहाल पार्टी ने अभी तक प्रबल प्रताप की जगह किसी नये नाम की घोषणा नहीं की है,लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि,जल्द ही कोई नया चेहरा इस पद पर काबिज होगा।

संवाददाता

मुजाहिद मजीदी

कन्नौज

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