NOTICE TO ZILANI DARGAH

पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित जिलानी दरगाह पर चलेगा बुलडोजर?

notice-to-zilani-dargah- जैसलमेर में भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर मौजूद एक दरगाह को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है…दरअसल पाक सीमा से सटे जैसलमेर जिले के  रामगढ़-तनोट बाईपास रोड स्थित महमूद शाह पीर जिलानी दरगाह को नोटिस जारी किया गया है….नोटिस के बाद सियासत गर्म हो गई है स्थानीय लोगों ने भी इस नोटिस और कार्रवाई का विरोध किया है….बताया जा रहा है कि दरगाह करीब 250 साल पुरानी है….और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक रही है

पाक बॉर्डर पर एक्शन

पाकिस्तान से सटे बॉर्डर इलाके में बॉर्डर क्लीन अभियान चलाया जा रहा है …तहसीलदार की ओर से राजस्थान उपनिवेशन अधिनियम, 1954 की धारा-22 के तहत नोटिस जारी किया गया है.

प्रशासन ने मांगे दस्तावेज

 प्रशासन ने नोटिस 18 जून को दरगाह परिसर की दीवार पर चस्पा किया था .. दरगाह प्रबंधन और संबंधित पक्षों को निर्देश दिए गए हैं जिसमें संबंधित भूमि और निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज तथा अन्य आवश्यक जानकारी 22 जून तक प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.  नोटिस में यह साफ तौर पर कहा गया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर  संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो 23 जून की दोपहर 12 बजे के बाद प्रशासन के जरिए नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है.

प्रशासन के एक्शन पर आक्रोश

प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई पर दरगाह से जुड़े स्थानीय लोगों और ग्रामीणों ने कड़ी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि महमूद शाह पीर जिलानी दरगाह लंबे समय से इस क्षेत्र के लोगों की इबादत का  बड़ा केंद्र रही है. जहां हिंदू और मुस्लिम सहित विभिन्न समुदायों के लोग आकर सजदा करते हैं. यहां हर साल में दो बार मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें दूर-दूर से जायरीन और स्थानीय पशुपालक मन्नतें मांगने आते हैं…. 1980 के आसपास जब  भारतीय सेना के जरिए इलाके में  सामरिक मोर्चे का निर्माण  कर रही थी, उस दौरान भी ग्रामीणों ने इस स्थान को दरगाह और कब्रिस्तान के रूप में चिन्हित किया था, जिसके बाद सेना ने कथित तौर पर निर्माण कार्य दूसरी जगह किया गया.  इस दरगाह का विकास श्रद्धालुओं के दान और पंचायत व जिला परिषद के सहयोग से हुआ है.

बुलडोजर एक्शन को लेकर नजरें

हालांक फिलहाल बॉर्डर इलाके में बनी इस दरगाह को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई है लेकिन माना जा रहा है कि प्रशासन जल्द कोई सख्त कदम ले सकता है ऐसे में 250 साल पुरानी इस दरगाह का अस्तित्व खतरे में है….और स्थानीय लोग इसे लेकर सतर्क हैं…अब देखना होगा कि प्रशासन का अगला कदम क्या होता है

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