नई दिल्ली: RBI Increases Repo Rate रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति की समिति ने अक्टूबर 2026 के लिए हुई बैठक में कड़ा फैसला लिया है. रेपो दर में 0.25 फीसदी की बढ़ोत्तरी की घोषणा की, इस तरह करीब 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाए हैं. इस बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के हालात की समीक्षा की गई. इसके चलते कच्ची तेल की कीमतें, खाने-पीने की चीजों के बढ़ते दामों पर चर्चा की गई.
रेपो रेट बढ़ने का असर
रेपो रेट बढ़ने से बैंक लोन महंगे हो जाते हैं क्योंकि रेपो रेट वह रेट होता है, जिस पर आरबीआई दूसरे बैंकों को कर्ज देता है. अब बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से लोन लेना महंगा होगा, तो उनके लिए फंड की लागत बढ़ जाएगी. इसके चलते बैंक होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन पर ब्याज दरें बढ़ा देंगे. ब्याज दरें बढ़ेंगी, तो EMI में भी बढ़ोत्तरी होगी.
अगर आपने ‘फ्लोटिंग रेट’ पर लोन लिया हुआ है, तो बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के साथ-साथ आपके लोन की मासिक किस्त (EMI) बढ़ जाएगी. कुछ मामलों में बैंक EMI को स्थिर रखकर लोन के भुगतान की कुल समयावधि को बढ़ा देते हैं.
एफडी पर ग्राहकों को होगा फायदा
ये अलग बात है कि, रेपो रेट बढ़ने से आपकी हर महीने जाने वाली ईएमआई महंगी हो जाएगी, लेकिन इसके कुछ फायदे भी हैं. दरअसल, रेपो रेट बढ़ने से बैंकों में Fixed Deposit (FD) कराने वाले ग्राहकों को फायदा होगा. इससे जमाकर्ताओं को अपनी बचत पर ब्याज दरें पहले के मुकाबले बढ़कर मिलेंगी.
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