Retired Judge support SIR

Retired Judge Support SIR: 42 पूर्व जज SIR के सपोर्ट में उतरे, ओपन लेटर लिखकर कह दी ये बड़ी बात

नई दिल्ली :  Retired Judge Support SIR स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ विपक्षी दलों का एक तरफ प्रदर्शन का दौर जारी है. वहीं, चुनाव आयोग और एसआईआर के समर्थन 42 पूर्व जज समर्थन में आ गए हैं. इस ग्रुप ने ओपन लेटर लिखकर चुनाव आयोग को कमजोर करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चेताया है. बता दें कि, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन पर रिटायर्ड जजों ने यह पत्र लिखा है. उन्होंने चुनाव आयोग, न्याय पालिका और दूसरे संवैधानिक संस्थानों को कथित तौर पर कमजोर करने के चल रहे अभियान पर गहरी चिंता जताई है. पूर्व जजों ने एसआईआर का समर्थन किया और कहा कि, कानून चुनाव आयोग को यह अधिकार देता है.

दो दशक पहले भी हुआ था SIR

इस पत्र में कहा गया कि, आज से दो दशक पहले भी ये प्रक्रिया हुई थी, तब किसी तरह के सवाल नहीं उठे थे. 7 अक्टूबर के लेटर में साइन करने वालों ने कहा कि वे पूर्व जजों और संवैधानिक पदों पर काम करने वाले रिटायर्ड लोगों के तौर पर लिख रहे हैं और उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई सरोकार नहीं है. उन्होंने कहा कि संस्थानों की आलोचना करना एक डेमोक्रेटिक अधिकार है, लेकिन आरोप लगाया कि संवैधानिक अधिकारियों को बिना किसी कोर्ट के सामने ऐसे आरोपों को साबित किए चोर, कठपुतली बताया जा रहा है.

चुनाव आयोग को अधिकार

रिटायर्ड जजों और संवैधानिक अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ एक्टिविस्ट ग्रुप बिना काफी सबूत के पिटीशन फाइल कर रहे थे और बाद में जब न्यायिक फैसलों से शिकायत करने वालों के फायदे नहीं होते थे, तो उनकी आलोचना की जाती थी. उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों से न्याय व्यवस्था में लोगों का भरोसा कम होने का खतरा है. इलेक्टोरल रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर साइन करने वालों ने कहा कि यह काम चुनावों को चलाने वाले संवैधानिक और कानूनी ढांचे का हिस्सा था.

रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 के सेक्शन 21(3) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इलेक्टोरल रोल में बदलाव करने का अधिकार है और कहा कि पहले भी इंटेंसिव रिवीजन किए गए हैं.

यह भी पढ़ें

India Block Protest : लंच के बाद इंडिया ब्लॉक का राजघाट तक मार्च, तीसरे दिन भी जारी रहेगा प्रोटेस्ट!

सबसे ज़्यादा पढ़े गए