S Jaishankar Ethiopia Visit: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में इथियोपियन इन्वेस्टमेंट्स होल्डिंग्स के सीईओ ब्रुक टाये से मुलाकात की। इस दौरान भारत और इथियोपिया के बीच निवेश साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी।
भारत-इथियोपिया के बीच निवेश बढ़ाने पर जोर
एस. जयशंकर ने X पर लिखा कि इथियोपियन इन्वेस्टमेंट्स होल्डिंग्स के सीईओ ब्रुक टाये से मुलाकात कर उन्हें खुशी हुई। बैठक में भारत और इथियोपिया के बीच निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई। इस मुलाकात को भारत की अफ्रीकी देशों के साथ आर्थिक साझेदारी मजबूत करने की कोशिशों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर तलाशने पर जोर दिया गया।
अफ्रीका में भारत के राजनयिक मिशनों के प्रमुखों के साथ बैठक
जयशंकर ने अदीस अबाबा में अफ्रीका में तैनात भारत के राजनयिक मिशनों के प्रमुखों के सम्मेलन की अध्यक्षता भी की। इसमें भारत और अफ्रीकी देशों के बीच व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, विकास साझेदारी और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अफ्रीका के संबंध ग्लोबल साउथ के देशों के बीच एकजुटता, रणनीतिक स्वायत्तता, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और साझा विकास लक्ष्यों पर आधारित हैं।
‘विकसित भारत 2047’ और ‘एजेंडा 2063’ का जिक्र
अदीस अबाबा स्थित अदवा मेमोरियल म्यूजियम में शुक्रवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने भारत और अफ्रीका के ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य पर काम कर रहा है, जबकि अफ्रीका ने अपने विकास की रूपरेखा ‘एजेंडा 2063’ के जरिए तय की है। दोनों पक्षों के विकास लक्ष्यों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत और अफ्रीका को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने वैश्विक संस्थानों में सुधार और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों पक्षों की उचित भागीदारी की जरूरत पर भी जोर दिया।
भारत-अफ्रीका के बीच करीब 100 अरब डॉलर का व्यापार
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार का कुल मूल्य करीब 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच रहा है। अफ्रीकी देशों में भारतीय निवेश विनिर्माण, दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, खनन, कृषि, बुनियादी ढांचे, वित्तीय सेवाओं और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है।
जयशंकर ने भारतीय कंपनियों से अफ्रीका को निवेश के प्रमुख गंतव्य के रूप में देखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां स्थानीय रोजगार पैदा करने, मूल्य संवर्धन बढ़ाने और अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने में योगदान देती रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की वकालत
जयशंकर ने कहा कि भारत और अफ्रीका को वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत दोहराते हुए मौजूदा व्यवस्था में प्रतिनिधित्व और प्रभावशीलता से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख किया।
इसके अलावा, उन्होंने डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन और सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं गिनाईं। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी भारत-अफ्रीका साझेदारी के संभावित प्रमुख क्षेत्र हैं।
तीन देशों के दौरे पर हैं एस. जयशंकर
एस. जयशंकर गुरुवार को इथियोपिया पहुंचे थे। यह उनकी तीन देशों की अफ्रीकी यात्रा का हिस्सा है, जिसमें घाना और कोट डी आइवर के दौरे भी शामिल हैं।
भारत और अफ्रीका के बीच व्यापार, औपनिवेशिक शासन के साझा ऐतिहासिक अनुभवों, हिंद महासागर के जरिए पुराने संपर्कों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग के आधार पर लंबे समय से संबंध रहे हैं। मौजूदा दौरे में आर्थिक सहयोग, निवेश और वैश्विक संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
