Nana Patekar Krantiveer

Nana Patekar Death: नाना पाटेकर के इन डॉयलाग्स पर बजती थी सीटियां, पढ़ें उनके टॉप संवाद

डेस्क:  Nana Patekar Death नाना पाटेकर एक ऐसे कलाकार थे, जो हर किरदार को अपने अभिनय से यादगार बना देते थे. वे अपनी अदायगी से किरदार को जीवंत कर देते थे. भले ही आज वे हमारे बीच में ना हो लेकिन अपनी फिल्मों और डॉयलाग के जरिये हमेश याद रहेंगे. हिंदी फिल्मों में बोले गये उनके डॉयलाग उनके फैंस की जुबान पर रहेंगे. हम आपको नाना पाटेकर कुछ दमदार डॉयलाग बताने जा रहे हैं, जिन्हे हर कोई पसंद करता है.

नाना की वो फिल्में जिनमें नाना के संवाद सुनकर सिनेमा हॉल में लोग जमकर सीटियां बजाते थे.

नाना पाटेकर के 10 अमर डायलॉग्स

बतौर अभिनेता नाना पाटकेर साल 1978 में आई फिल्म गमन से अपने एक्टिंग करियर का आगाज किया था. इसके बाद वह क्रांतिवीर, यशवंत और तिरंगा जैसी कई बेहतरीन फिल्मों का हिस्सा रहे और उनकी फिल्मों के डायलॉग्स भी काफी लोकप्रिय रहे थे, जो इस प्रकार है.

 

आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने…क्रांतिवीर

ये मुसलमान का खून ये हिंदू का खून… बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा… क्रांतिवीर

एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है… यशवंत

धंधे में कोई किसी का भाई नहीं, कोई किसी का बेटा नहीं… परिंदा

 सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान… यशवंत

मराठा मरता है या मराता है… तिरंगा

हम सब एक ही मिट्टी के बने हैं…क्रांतिवीर

हम सब सिस्टम का हिस्सा हैं, सिस्टम डिसाइड करता है, अपुन फॉलो करता है… अब तक छप्पन

एक सैनिक के लिए उसका देश ही उसका परिवार होता है… प्रहार

साला ये दुःख काहे खत्म नहीं होता बे… वेलकम

क्रांतिवीर फिल्म का डॉयलाग कोई नहीं भूल सकता

नाना पाटेकर के एक्टिंग करियर के अगर किसी डायलॉग की सबसे ज्यादा जिक्र होता है, तो वह साल 1994 में आई फिल्म क्रांतिवीर है. इसका डॉयलाग मेरी मौत का तमाशा देखने, वाला संवाद सबसे अधिक पॉपुलर रहा था, जिसे आज भी याद किया जाता है.

यह भी पढ़ें

Nana Patekar Death: पिता की वजह से एक्टिंग में आए नाना, जानिए कौन-कौन था परिवार में

सबसे ज़्यादा पढ़े गए