Sir Controversy: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। रमेश ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां की हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इससे चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठाए जा रहे विपक्ष के सवालों को बल मिला है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जस्टिस भुइयां के भाषण का वीडियो साझा करते हुए CEC पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार सरकार के ‘अवैध आदेशों’ को लागू कर रहे हैं और अब वह देश के लिए ‘बोझ’ बन गए हैं। ये रमेश द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
जस्टिस भुइयां ने क्या कहा था?
जस्टिस उज्जल भुइयां ने रविवार को हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में 19वें जस्टिस बीआर सावहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में बोलते हुए मताधिकार से जुड़े संवैधानिक पहलुओं पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि अगर कोई प्रक्रिया लाखों भारतीय नागरिकों को उनके वोट देने के अधिकार से वंचित करती है और उन्हें अपने ही देश में बिना मताधिकार वाले ‘दूसरे दर्जे के नागरिक’ की स्थिति में पहुंचाती है, तो ऐसी प्रक्रिया ‘भाविक रूप से मनमानी’ है। जस्टिस भुइयां ने यह भी कहा कि ऐसी प्रक्रिया को किसी भी तरह के तर्क से उचित नहीं ठहराया जा सकता और यह संविधान की मूल भावना पर असर डालती है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 और 326 के संदर्भ में भी मताधिकार और समानता के पहलुओं का उल्लेख किया।
जयराम रमेश ने CEC पर साधा निशाना
जस्टिस भुइयां की टिप्पणी के बाद जयराम रमेश ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने X पर लिखा कि अगर CEC में ‘शर्म’ है तो उन्हें तुरंत पद छोड़ देना चाहिए। रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर ‘G2 के अवैध आदेशों’ को लागू करने की क्षमता ने उन्हें देश के लिए ‘iability’ बना दिया है। कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी पार्टी के राजनीतिक रुख के अनुरूप है और इसे CEC के खिलाफ एक आरोप के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में।
SIR को लेकर पहले से जारी है विवाद
SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच पहले से विवाद चल रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। वहीं चुनाव आयोग SIR की प्रक्रिया का बचाव करते हुए इसे मतदाता सूची को दुरुस्त करने की कवायद बताता रहा है।
विवाद उस रिपोर्ट के बाद भी बढ़ा, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर मतदाता सूची, पंजीकरण और आयोग की तकनीकी प्रणालियों से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां उठाई थीं। चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों को संस्थागत असहमति मानने से इनकार किया और कहा कि ड्राफ्ट चरण में सवाल, सुझाव और इनपुट देना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के कार्यक्रम से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
रविवार को दिल्ली में भी हुआ था प्रदर्शन
SIR विवाद को लेकर रविवार को इंडियन यूथ कांग्रेस ने दिल्ली में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी रायसीना रोड से जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे थे और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने केंद्र सरकार पर ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग की गई थी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। इस पूरे विवाद के बीच जस्टिस उज्जल भुइयां की टिप्पणी और उस पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया ने SIR और मताधिकार को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
