CJP Protest News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के दो कार्यकर्ताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का मामला गरमा गया है। पार्टी के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में असहमति की आवाज को दबाने के लिए ‘अघोषित इमरजेंसी’ जैसे हालात बनाए जा रहे हैं। वहीं, उन्होंने साफ किया कि CJP किसी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं बनेगी, लेकिन चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को उसी लड़ाई का हिस्सा मानती है।
हमारा मुद्दा एक है, लेकिन CJP स्वतंत्र दबाव समूह रहेगी
अभिजीत दिपके ने INDIA गठबंधन के साथ आंदोलन में शामिल होने के सवाल पर कहा कि अलग-अलग संगठनों के प्रदर्शन का उद्देश्य एक हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि CJP किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के जरिए चुनावों में कथित अनियमितताएं हो रही हैं और इससे नरेंद्र मोदी को सत्ता में बने रहने में मदद मिल रही है।
दिपके ने कहा कि CJP एक स्वतंत्र दबाव समूह है और आगे भी अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब INDIA गठबंधन के विरोध में होना नहीं है। दोनों आंदोलनों का मुद्दा एक है, इसलिए वे एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
तिरंगा लहराने पर हिरासत क्यों? सरकार से पूछा सवाल
CJP कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रंका को जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के बाद पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर दिपके ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहे थे, तो उन्हें इतनी लंबी न्यायिक हिरासत में भेजने की जरूरत क्यों पड़ी।
दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार देश में आपातकाल जैसे हालात लागू करना चाहती है, तो उसे खुलकर ऐसा करना चाहिए। उन्होंने इसे ‘अघोषित इमरजेंसी’ बताते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध करने वालों को हिरासत में लेकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, ये दिपके के आरोप हैं। पुलिस की कार्रवाई के आधार और मामले की कानूनी स्थिति को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आए हैं।
‘अर्बन नक्सल’ के आरोपों पर भी दी प्रतिक्रिया
CJP के आंदोलन को ‘अर्बन नक्सलवाद’ से जोड़ने के आरोपों पर भी अभिजीत दिपके ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर किसी को आंदोलन या संगठन की गतिविधियों पर संदेह है, तो जांच कराई जा सकती है, लेकिन बिना आधार आरोप लगाने का क्या मतलब है? उनका कहना था कि सत्ता में बैठे लोगों को आरोप लगाने के बजाय तथ्यों के आधार पर जांच करनी चाहिए।
AAP ने बताया तानाशाही, वंदे मातरम के नारे लगाने का दावा
इस मामले में आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर सवाल उठाते हुए इसे ‘तानाशाही’ करार दिया। वहीं, CJP कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने तिरंगा लहराया और ‘वंदे मातरम’ तथा ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। शिंदे के मुताबिक, संगठन की नेशनल वर्किंग कमेटी बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगी।
कार्यकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता अभिष्ट हेल ने भी हिरासत की कार्रवाई और दिल्ली पुलिस की ओर से बताए गए आधारों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि असहमति की आवाज को दबाने के लिए निवारक कार्रवाई का इस्तेमाल किया जा रहा है।
जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को CJP के कार्यकर्ताओं को उस समय हिरासत में लिया, जब वे प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन स्थल को निर्धारित विरोध स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद कार्यकर्ताओं पर अनधिकृत प्रवेश का आरोप लगाया गया। यह घटनाक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP और विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है। प्रदर्शनकारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल, इस मामले में CJP और विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं, जबकि पुलिस की ओर से प्रदर्शन स्थल में प्रवेश को लेकर अलग आधार बताया गया है। आने वाले दिनों में संगठन की बैठक और आगे की रणनीति पर सभी की नजरें रहेंगी।
