नई दिल्ली: SIR Controversy मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआऱ के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के बीच देश के 124 पूर्व आईएएस और आईएफएस अफसरों ने SIR क बचाव किया है. उन्होंने CEC का समर्थन करते हुए देश के नाम खुला पत्र लिखा है. पूर्व अधिकारियों ने तर्क देते हुए कहा कि, चुनावी धोखाधड़ी के आरोपों के लिए ठोस सबूत होने चाहिए. साथ ही इस समूह ने कहा कि, बिना सबूत के वोट चोरी के दावे लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कमजोर करता है.
पूर्व अधिकारियों ने उठाए सवाल
पूर्व अफसरों ने सवाल उठाया कि जब कोई दल चुनाव जीतता है तो वही प्रणाली निष्पक्ष मान ली जाती है, लेकिन हारने पर उसी व्यवस्था को ‘फिक्स्ड’ या ‘रिग्ड’ बता दिया जाता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इसी चुनाव आयोग के तहत केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी ने हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में चुनाव हारे हैं और 2024 में अपना बहुमत भी खोया है.
बिहार में हुए चुनाव का उदाहरण
पत्र में कहा गया है कि असली ‘धांधली’ क्या होती है, यह उस दौर के अधिकारियों ने देखा है जब कट्टे, बाहुबलियों का खौफ, बैलेट बॉक्स की लूट और बूथ कैप्चरिंग हुआ करती थी. 1989 में संसद ने इसे अपराध घोषित किया. पत्र में बिहार के 2025 चुनावों का जिक्र करते हुए कहा गया कि पहली बार वहां बिना किसी री-पोल के शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न हुए, जिसमें 1951 के बाद से सबसे ज्यादा मतदान हुआ और महिलाओं ने रिकॉर्ड संख्या में वोट डाले.
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