Allahabad High Court on Hookah Bar: उत्तर प्रदेश में हुक्का बार चलाने और रेस्टोरेंट या कैफे में ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध कराने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर बने Designated Smoking Area में भी रेस्टोरेंट या अन्य प्रतिष्ठान हुक्का सेवा नहीं दे सकते।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हुक्का बार के संचालन से जुड़ी याचिकाओं के एक समूह को खारिज करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में रेस्टोरेंट द्वारा हुक्का सेवा देना Prohibition of Smoking in Public Places Rules, 2008 के नियम 4(3), जिसमें 2017 में संशोधन किया गया था, के खिलाफ है। कोर्ट ने इसे COTPA, 2003 के प्रावधानों के विपरीत भी माना।
क्या है हाईकोर्ट का नया फैसला?
यह फैसला न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अब्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने 29 सितंबर 2026 को सुनाया। मामला उन रेस्टोरेंट और अन्य प्रतिष्ठानों से जुड़ा था, जो हुक्का सेवा जारी रखने के लिए अदालत पहुंचे थे।कोर्ट ने संबंधित याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में रेस्टोरेंट के जरिए हुक्का बार चलाना या ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध कराना मौजूदा नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं है।
Smoking Zone में भी नहीं दिया जा सकेगा हुक्का
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि Designated Smoking Area होने का मतलब यह नहीं है कि वहां रेस्टोरेंट ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध करा सकता है। कोर्ट ने 2017 में किए गए नियम 4(3) के संशोधन पर विशेष रूप से विचार किया। अदालत के अनुसार, संशोधन के बाद स्मोकिंग एरिया में केवल धूम्रपान की अनुमति का अपवाद मौजूद है, लेकिन वहां किसी तरह की सेवा उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं है।इसका मतलब है कि रेस्टोरेंट या कैफे केवल यह कहकर हुक्का सेवा जारी नहीं रख सकते कि ग्राहक को हुक्का अलग बनाए गए Smoking Area में दिया जा रहा है।
अब यूपी के रेस्टोरेंट और कैफे पर क्या असर पड़ेगा?
फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में रेस्टोरेंट, कैफे, लाउंज और इसी तरह के सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के लिए केवल अलग Smoking Area बनाना हुक्का सेवा जारी रखने का आधार नहीं रहेगा।यानी किसी प्रतिष्ठान में Smoking Area मौजूद होने के बावजूद वहां ग्राहकों को रेस्टोरेंट की ओर से हुक्का उपलब्ध कराने पर हाईकोर्ट के इस फैसले में बताई गई कानूनी पाबंदियां लागू होंगी।
