डेस्क: तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी (Telangana CM Revanth Reddy) के एक बयान के बाद सियासी बवाल खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री ने एक कार्यक्रम के दौरान उत्तर और दक्षिण की सियासत, धार्मिक पहचान की तुलना अजीबो-गरीब ढंग से कर दी. वहीं, बीजेपी ने रेड्डी पर निशाना साधते हुए कहा कि, सीएम रेड्डी अपने सियासी फायदे के लिए लोगों के बांटने की कोशिश कर रहे हैं.
एक कार्यक्रम के दौरान रेवंत रेड्डी ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि, उनकी पार्टी जय श्री राम का नारा बहुत इस्तेमाल करती है. उन्होंने सवाल पूछा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेता उसी तरह हर हर महादेव का नारा क्यों नहीं लगाते.
अमीरों के भगवान राम, गरीबों के शिव
रेड्डी ने कहा, “हम द्रविड़ हैं, वे आर्य हैं. हम भगवान शिव के भक्त हैं, जबकि वे भगवान राम के भक्त हैं.” उन्होंने भगवान शिव को गरीबों का देवता और भगवान राम को अमीरों का देवता बताया. उन्होंने ये भी कहा कि लोग दोनों देवताओं को पूजते हैं. रेड्डी ने ये कहकर बताना चाहते थे कि, उत्तर और दक्षिण भारतीय संस्कृति में काफी अंतर है.
परिसीमन की प्रक्रिया पर सवाल
रेड्डी ने लोकसभा सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया पर भी चिंता जताई. उनका तर्क था कि जनसंख्या के आधार पर सीटों की संख्या बढ़ने से दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक महत्व बदल सकता है.
बीजेपी का पलटवार
मुख्यमंत्री के इस बयान पर बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने रेड्डी पर भगवान शिव और भगवान राम के बीच राजनीतिक बंटवारा पैदा करने का आरोप लगाया. संजय ने काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ पीएम मोदी के जुड़ाव का जिक्र किया और वेमुलावाड़ा की उनकी यात्रा का हवाला दिया. उन्होंने रेड्डी के दावे को खारिज किया कि, बीजेपी नेता भगवान शिव का नाम नहीं लेते.
बीजेपी नेता ने कहा, “रेवंत रेड्डी ने पहले कहा था कि मुस्लिम ही कांग्रेस हैं और कांग्रेस ही मुस्लिम है, अब भगवान राम और भगवान शिव के बीच राजनीतिक लकीरें खींच रहे हैं. तेलंगाना के मुख्यमंत्री होने के नाते जहां वेमुलावाड़ा में दक्षिण काशी और भद्राचलम में दक्षिण अयोध्या स्थित हैं रेड्डी को भगवान राम और भगवान शिव को उत्तर और दक्षिण में बांटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.”
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