अहमदाबाद: गुजरात में रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में 27 सितंबर को कई बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत होने जा रही है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह साबरमती में 1,542 करोड़ रुपये से अधिक की रेल परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इस दौरान वह देश की पहली LNG आधारित ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाएंगे। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी, राज्य मंत्री दर्शनाबेन वाघेला, सांसद हसमुखभाई पटेल और दिनेशभाई मकवाना, अहमदाबाद के मेयर हितेशभाई बारोट समेत कई अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहेंगे।
404 KM रेल नेटवर्क पर लगेगा कवच
इन परियोजनाओं में अहमदाबाद मंडल के 404 किलोमीटर रेल नेटवर्क पर स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम ‘कवच’ लगाने की योजना भी शामिल है। इस पर करीब 411 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कवच के तहत अहमदाबाद-पलनपुर सेक्शन के 157 किलोमीटर और अहमदाबाद-सामखियाली सेक्शन के 247 किलोमीटर रेल नेटवर्क को कवर किया जाएगा। यह सिस्टम ट्रेनों के बीच टक्कर रोकने, ओवरस्पीडिंग से सुरक्षा देने और मानवीय गलती से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका कम करने में मदद करेगा। इससे ट्रेन संचालन की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है।
27 सितंबर को देश की पहली LNG ट्रेन को हरी झंडी
कार्यक्रम की प्रमुख खासियत भारत की पहली LNG आधारित ट्रेन को हरी झंडी दिखाना होगी। इसके लिए साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में दो 1,400 हॉर्स पावर क्षमता वाले ड्राइविंग पावर कारों को डीजल-LNG डुअल फ्यूल सिस्टम में बदला गया है। इस तकनीक के जरिए डीजल की खपत में करीब 40 प्रतिशत तक LNG की जगह ली जाएगी। इससे ईंधन खर्च कम करने के साथ कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
700 करोड़ में बना WAG-12 लोकोमोटिव शेड
साबरमती में करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से WAG-12 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड तैयार किया गया है। यहां करीब 300 हाई-हॉर्सपावर WAG-12 इलेक्ट्रिक इंजनों के रखरखाव की सुविधा उपलब्ध होगी। WAG-12 लोकोमोटिव करीब 12,000 हॉर्सपावर क्षमता वाले इंजन हैं, जिन्हें भारी और लंबी मालगाड़ियों को खींचने के लिए डिजाइन किया गया है।
122.57 KM रेल सेक्शन पर ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग
साबरमती-कलोल-भांडू मोटीदौ और साबरमती-साणंद-जखवाड़ा रेल सेक्शन के कुल 122.57 किलोमीटर हिस्से में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम शुरू किया गया है। इस परियोजना पर करीब 118.83 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह सिस्टम ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने में मदद करेगा और एक ही रूट पर ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुचारू बनाकर रेल लाइन की क्षमता बढ़ाएगा।
साबरमती-सारखेड़ रेल लाइन का होगा दोहरीकरण
साबरमती-सारखेड़ रेल लाइन के 21 किलोमीटर हिस्से के दोहरीकरण की परियोजना की अनुमानित लागत 313.27 करोड़ रुपये है। इसे मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना में साबरमती, गांधीनगर? नहीं गांधीग्राम, वस्त्रापुर और सारखेड़ जैसे स्टेशनों से जुड़े काम के अलावा पुल और रोड अंडरपास का निर्माण भी शामिल है। रेल लाइन के दोहरीकरण से ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होने के साथ सारखेड़-दाहोदरा? क्षेत्र में कनेक्टिविटी और औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रेल सुरक्षा और पर्यावरण पर फोकस
इन परियोजनाओं का उद्देश्य गुजरात में रेल नेटवर्क की सुरक्षा, क्षमता और कनेक्टिविटी बढ़ाना है। LNG आधारित ट्रेन के जरिए रेलवे में वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है, जबकि कवच और ऑटोमैटिक सिग्नलिंग जैसी तकनीकों से रेल परिचालन को ज्यादा सुरक्षित और बेहतर बनाने पर जोर है।
