राम मंदिर में चढ़ावा कांड के गुनहगारों पर शिकंजा.

राम मंदिर में चढ़ावा कांड के गुनहगारों पर शिकंजा और ज्यादा कस गया है. लेकिन हैरानी वाली बात ये है कि बढ़ती जांच में आरोपियों के खिलाफ हर दिन नए खुलासे और नए सबूत मिल रहे हैं.

Ram Mandir scandal: इन सबके बीच सवालों के घेरे में ट्रस्ट की त्रिमूर्ति भी हैं. यानी चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव, जिनके भविष्य पर 6 जुलाई को अयोध्या की बैठक में फैसला होने वाला है. माना जा रहा है कि बैठक के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी कि आखिर राम मंदिर में रामद्रोही के असली किरदार के कितने चेहरे थे.

आठ आरोपियों के बाद अब हर निगाह उन तीन चेहरों पर टिकी हुई है…जो लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. SIT ने महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अपने रडार पर ले लिया है. शुक्रवार को SIT ने इनमें से दो दिग्गजों अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आमने-सामने बैठाकर घंटों मैराथन पूछताछ की. पूछताछ के दौरान चंपत राय भी तीर्थ क्षेत्र में मौजूद रहे.

SIT ने अनिल मिश्रा और गोपाल राव की व्यक्तिगत चल-अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा और कानूनी दस्तावेज तलब कर लिए हैं. अनिल मिश्रा के नए आवास, आय के स्रोतों और पिछले कुछ वर्षों में हुई उनकी कमाई की गहराई से पड़ताल हो रही है. जांच केवल चढ़ावे की चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर निर्माण और जमीनों की खरीद-फरोख्त के दौरान हुई मोटी कमीशनखोरी और अपनों को लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोपों की भी परतें खोली जा रही हैं. ट्रस्ट के खातों का ‘री-ऑडिट’ होने जा रहा है. यानी देखा जाए कहां से कितना पैसा आया, कहां लगा, कितना बचाया गया. अगर इसमें गड़बड़ी मिली तो शिकंजा नए सिरे भी कस सकता है.

इन सबके बीच निगाहें सीधे तौर पर 6 जुलाई को सुपर मंडे पर टिकी हैं. जब अयोध्या की मणिराम दास छावनी में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सबसे हाई-प्रोफाइल और आपातकालीन बैठक होगी. जिसमें महंत नृत्यगोपाल दास समेत ट्रस्ट के सभी सदस्य मौजूद रहेंगे. उस बैठक में तय होगा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर क्या किया जाए. ट्रस्ट ने साफ कर दिया है कि इस्तीफों को लेकर सबसे पहले चर्चा होगी उसके बाद बैठक में चढ़ावा चोरी की जांच कर रही SIT की अंतरिम रिपोर्ट भी रखी जाएगी. इसके अलावा नए पदाधिकारियों की भर्ती और मंदिर की नई वित्तीय व्यवस्था पर मुहर लगेगी.

संक्षेप में कहें तो
ट्रस्ट की बैठक के प्रमुख एजेंडा
त्यागपत्र पर विचार
मंदिर प्रबंधन व्यवस्था पर विचार
रिक्त पदों पर चयन, नामों पर चर्चा
अन्य आवश्यक विषयों पर बात

हालांकि इन सबसे पहले ही चंपत राय के समर्थन में साधु संतों से लेकर देश के शंकराचार्य भी अपने समर्थन की धूनि रमाते नजर आ रहे हैं. वहीं राजनेता इन पवित्र तपोभूमियों को सिर्फ टूरिस्ट डेस्टिनेशन (पर्यटन स्थल) के रूप में देखते हैं, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं. ऐसी चोरियों और कुप्रबंधन को रोकने के लिए तुरंत एक गैर-विवादित ‘सनातन धर्म रक्षण समिति’ का गठन होना चाहिए, जिसमें चारों पीठों के शंकराचार्य शामिल हों, ताकि देश के किसी भी मंदिर में फिर कभी ऐसा पाप न हो सके
एक तरफ ट्रस्ट की तीन अहम हस्तियों पर फैसला होना है. तो दूसरी तरफ पकड़े गए आरोपियों की अकूत संपत्तियों पर हर दिन के साथ नए खुलासे हो रहे हैं. इनमें भी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और अविनाश शुक्ला पर सनसनीखेज खुलासों की बाढ़ आई हुई है. जिन्होंने चढ़ावा गिनती की पवित्र व्यवस्था को ‘लूट का जरिया’ बना लिया.

जांच एजेंसियों ने आरोपी अनुकल्प मिश्रा और उसके जीजा लवकुश मिश्रा की 12 से ज्यादा संपत्तियों को चिह्नित किया है, जिनमें से कुछ हाल फिलहाल में खरीदी गई हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक लवकुश और अनुकल्प ने रामलला के चढ़ावे के पैसों का इस्तेमाल कर अयोध्या, बसावा, मिल्कीपुर और रुदौली समेत कई इलाकों में करोड़ों रुपये की जमीनें और मकान खरीद डाले. इनमें से कुछ संपत्तियां तो आरोपियों के नाम हैं.तो कुछ परिवारवालों के नाम पर होने की जानकारी मिली हैं.

अयोध्या प्रशासन और SIT अब इन संपत्तियों के खरीद की तारीख और पैसों के स्रोत को खंगाल रही है. शासन स्तर से साफ निर्देश हैं, अगर यह संपत्तियां रामलला के दान के पैसों से खरीदी गई हैं, तो इन्हें तुरंत कुर्क कर जब्त किया जाएगा.
इस पूरे खेल में अविनाश मिश्रा पुलिस की रडार पर सबसे ज्यादा पकड़ा जा रहा है. जिसे चढ़ावा चोरी की जांच में कई जगहों पर अब तक पूछताछ के लिए ले जाया गया. फिर चाहे वो योगा केंद्र हो जहां पैसे मिले थे या फिर चढ़ावा बंटवारे वाली जगहें, इसी दौरान पूछताछ में अविनाश की ब्रेजा गाड़ी की जानकारी मिली थी, जो अब पुलिस की सुरक्षा में पहुच चुकी है. बताया जा रहा है कि ये ब्रेजा कार भी चढ़ावा चोरी का पाप करने के बाद उसके पैसों से खरीदी गई थी.

चढ़ावा चोरी की महा-लूट में शामिल लापरवाह बैंक अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है. SIT ने पूछा है कि निजी सुरक्षा एजेंसी के हाथों में नकदी गिनने जैसा संवेदनशील काम किसके इशारे पर सौंपा गया?. अयोध्या की धरती इस समय धर्म और कानून की अग्निपरीक्षा की गवाह बन रही है. देखना होगा कि 6 जुलाई की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर क्या फैसला होगा का युग समाप्त हो जाएगा, या फिर एसआईटी की जांच की आंच में कई और बड़े नाम स्वाहा होने बाकी हैं!