Amarnath Yatra Security: 3 जुलाई से बाबा बर्फानी की पवित्र अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होने जा रही है। इस बार की यात्रा न सिर्फ आस्था के लिहाज से बल्कि सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के मामले में भी बेहद ऐतिहासिक होने वाली है।एक तरफ जहाँ 3.5 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड प्री-रजिस्ट्रेशन हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान समर्थित आतंकी साजिशों को नाकाम करने के लिए सुरक्षा बलों ने घाटी को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया है।
3 जुलाई की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ चुकी हैं।अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर नियंत्रण रेखा तक सुरक्षा चक्र को कई गुना मजबूत कर दिया गया है।जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों में जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने व्यापक संयुक्त तलाशी अभियान चलाया।
खुफिया इनपुट के मुताबिक करीब 45 विदेशी आतंकी जो लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी संगठनों से जुड़े हैं वो इस पवित्र यात्रा को निशाना बनाने की फिराक में हैं। इसी खतरे को भांपते हुए सुरक्षाबल हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रख रहे हैं। हाल ही में 26 जून को पुंछ सेक्टर में LoC पर एक पाकिस्तानी घुसपैठिए की गिरफ्तारी ने एजेंसियों को और अधिक सतर्क कर दिया है।
अमरनाथ यात्रा के इतिहास में पहली बार भारत की सबसे गुप्त और घातक फोर्स स्पेशल फ्रंटियर फोर्स यानी SFF की विकास बटालियन को सुरक्षा की कमान सौंपी गई है। इस खास फोर्स की एक पूरी बटालियन को पहलगाम यात्रा रूट की उन ऊंची पहाड़ियों पर तैनात किया गया है जहां आम इंसान के लिए सांस लेना भी दूभर होता है।
17,000 फीट की ऊंचाई पर गुरिल्ला युद्ध लड़ने में माहिर ये भारतीय सेना की सबसे शांत लेकिन सबसे खतरनाक यूनिट है। तिब्बती शरणार्थियों और नेपाल के गोरखाओं के मिश्रण से बनी इस फोर्स को सीधे RAW नियंत्रित करता है।
पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमलों और पाकिस्तानी आतंकियों की मौजूदगी की खबरों के बाद इन जांबाज कमांडोज को 12,756 मीटर ऊंचे गुफा मंदिर के ऊपरी रणनीतिक रास्तों और जंगलों को सैनिटाइज करने का जिम्मा मिला है ताकि ऊंचाई से श्रद्धालुओं पर कोई घात न लगा सके।
चीन के खिलाफ जंग के बाद 1962 में स्पेशल फ्रंटियर फोर्स को गठन किया गया था
1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और चटगाँव पहाड़ियों में पाकिस्तानी पोस्ट को तबाह किय था
1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार में भी स्पेशल फ्रंटियर फोर्स का इस्तेमाल किया गया था
1999 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग में SFF की गुप्त तैनाती भी की गई थी
2020 में ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के तहत LAC में चीनी घुसपैठ के खिलाफ रणनीतिक भूमिका निभाई थी
सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए गृह मंत्रालय ने इस साल अब तक की सबसे बड़ी तैनाती को मंजूरी दी है CRPF, BSF, ITBP और जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक से ज्यादा जवान और 670 से अधिक CAPF कंपनियां तैनात की गई हैं
पूरी यात्रा मार्ग पर 400 से ज्यादा CCTV और फेशियल रिकग्निशन कैमरे लगाए गए हैं जिनकी लाइव मॉनिटरिंग 3 बड़े कमांड सेंटर्स से होगी… इतना ही नहीं स्थानीय सेवा देने वालों के लिए QR-कोड पहचान ऐप और सभी यात्रियों के लिए RFID कार्ड जरूरी कर दिया गया है। बिना इंटरनेट के भी यह तकनीक संदिग्ध लोगों को रास्ते से दूर रखेगी।
प्रशासन के सामने सिर्फ आतंकवाद ही नहीं बल्कि कश्मीर का अनियमित मौसम भी एक बहुत बड़ी चुनौती है।पिछले कुछ महीनों से घाटी की पहाड़ियों में बेमौसम भारी बारिश और बादल फटने की घटनाएं लगातार हो रही हैं।
2022 में आई अचानक बाढ़ जैसी त्रासदी दोबारा न हो, इसके लिए इस बार श्रीनगर, बनिहाल टॉप, जम्मू और लेह में डॉपलर वेदर रडार को 24×7 एक्टिव रखा गया है। ये एडवांस्ड सिस्टम 24 घंटे पहले ही बादल फटने या तेज तूफान की सटीक जानकारी दे देगा।इसके साथ ही लैंडस्लाइड और संवेदनशील इलाकों में अत्याधुनिक गियर से लैस 45 माउंटेन रेस्क्यू टीमें तैनात की गई हैं।
अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए खुद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पूरी तरह सतर्क हैं और कमान संभाले हुए हैं। एलजी मनोज सिन्हा यात्रा की सुरक्षा से लेकर बुनियादी सुविधाओं की हर बारीक से बारीक चीज पर पैनी नजर रख रहे हैं। वे लगातार हर स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें कर रहे हैं और अधिकारियों को जमीनी स्तर पर मुस्तैद रहने के कड़े दिशा-निर्देश दे रहे हैं।
बाबा के भक्तों के लिए इस साल सरकार ने एक और बड़ी और ऐतिहासिक राहत दी है…
अमरनाथ यात्रियों का लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस कवर बिना किसी प्रीमियम के 5 लाख से बढ़ाकर सीधा 10 लाख कर दिया गया है।
श्रद्धालुओं को मुफ्त और तुरंत चिकित्सा सुविधा देने के लिए यात्रा मार्ग पर दो 100 बिस्तरों वाले विशेष अस्पताल तैयार किए गए हैं।
जहां स्पेशलिस्ट और सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के साथ सैकड़ों पैरामेडिकल स्टाफ तैनात रहेगा… साथ ही मुश्किल रास्तों के लिए 24 घंटे एम्बुलेंस की सेवा भी उपलब्ध रहेगी। उप-राज्यपाल के निर्देश पर फरवरी से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं जिसके चलते दोनों रास्तों से बर्फ हटाने का काम समय से पहले पूरा कर लिया गया है
साफ है कि इस बार की अमरनाथ यात्रा आस्था आधुनिक तकनीक और देश की सबसे जांबाज ताकतों के अनूठे संगम की गवाह बनने जा रही है। जहां एक तरफ विकास बटालियन जैसी गुप्त ताकतें आसमान छूती चोटियों पर देश के दुश्मनों के काल के रूप में खड़ी हैं। वहीं दूसरी तरफ आधुनिक डॉपलर रडार और स्वास्थ्य सुविधाएं भक्तों के सफर को सुगम बनाने के लिए मुस्तैद हैं। देश को पूरा भरोसा है कि सुरक्षाबलों के इस अभेद्य चक्रव्यूह के बीच बाबा बर्फानी की ये यात्रा बेहद सफल सुरक्षित और भव्य होगी।
