मैनपुरी में लखनऊ जैसे अग्निकांड का इंतजार?

Mainpuri OYO Hotel:उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में इन दिनों पुलिस-प्रशासन और फायर ब्रिगेड की मुस्तैदी का एक अलग ही मॉडल देखने को मिल रहा है।ये मॉडल है होटल के सुरक्षा मानकों की जांच की खानापूर्ति करने का। और सोशल मीडिया पर शोर मचने पर जांच टीम गठित करने का।

जी हां सही सुन रहे हैं आप, यहां होटल संचालन के लिए बनाए गए नियम-कायदे केवल कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं।हकीकत में कुछ और ही खेल चल रहा है।ताजा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के रेलवे स्टेशन के पास खुले OYO होटल,गुरु कॉन्टिनेंल का है।जहां सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है।स्थानीय लोग तो इस बात से डरे हैं कि,सुरक्षा मानकों की अनदेखी कहीं किसी बड़े हादसे को दावत न दे दे।लेकिन साहब..विभाग है कि,उसकी नींद ही नहीं खुल रही है।

छापेमारी के नाम पर खानापूर्ति?

स्थानीय लोगों द्वारा लगातार सुरक्षा मानकों की अनदेखी की शिकायत करने के बाद आखिरकार पुलिस-प्रशासन की नींद खुली। और लाव लश्कर के साथ एक बड़ी टीम होटल की जांच करने पहुंची।लोगों को लगा भाई साहब,अब तो कड़ी कार्रवाई होगी।होटल पर तगड़ा जुर्माना लगेगा। कुछ लोग तो होटल सील होने की भी बात कहने लगे।होटल संचालक को जेल भेजे जाने की बात भी बिना की आधार के अफवाह की बैशाखी लेकर तैराने लगी।

लोग यहां तक कहने लगे कि, होटल की छापेमारी के दौरान इतनी कमियां मिली कि,गिनते-गिनते कैलकुलेटर भी थक जाए।लेकिन अचानक चमत्कार हो गया!जिस तेजी से टीम आई थी,उसी तेजी से वापस भी चली गई।वो भी बिना कोई ठोस कार्रवाई किये।स्थानीय लोग समझ ही नहीं पाए कि,छापे की ये कार्रवाई असल में छापेमारी थी,या केवल चाय-पानी का हिसाब किताब तय करने का तरीका?

भाई साहब अब सोशल मीडिया का जमाना है,लिहाजा जब छापेमारी में कोई कार्रवाई होटल के खिलाफ नहीं हुई,तो लोग जिला प्रशासन पर ही सवाल खड़ा करने लगे।उसकी ईमानदारी को ही सवालों के कटघरे में खड़ा करने लगे।

मैनपुरी में भी लखनऊ जैसे हादसे का इंतजार?

स्थानीय लोगों का कहना है कि, होटल में न तो फॉयर सेफ्टी मेजर का पालन किया गया है। ना ही आपातकालीन व्वस्थाओं से निपटने की कोई व्यवस्था।यानि सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।अगर गलती से भी कोई हादसा हो जाए,तो होटल में ठहरने वालों का ऊपर का टिकट कटना तो तय है!जिसके बाद लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि,क्या मैनपुरी प्रशासन को भी लखनऊ अग्निकांड जैसे हादसे का इंतजार है?

जिला प्रशासन से जनता पूछ रही सवाल

मैनपुरी के गलियारों में अब यह चर्चा जोरों पर है कि, बिना प्रशासनिक साठगांठ या ऊंची रखूख के कोई इतनी बड़ी लापरवाही कैसे कर सकता है? रेलवे स्टेशन जैसी संवेदनशील जगह पर, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम होने चाहिए, वहां एक होटल बिना सुरक्षा मानकों के खुलेआम कैसे चल रहा है। स्थानीय नागरिकों का ये भी कहना है कि, यह सब ऊपर से नीचे तक जेब गर्म करने का खेल है,जिसके बाद अधिकारी भी चैन की नींद सो जाते हैं।

सोशल मीडिया पर सवाल,DM साहब का एक्शन करेगा कमाल?

मामले को तूल पकड़ता देख,जिलाधिकारी साहब एक्शन में आए,और पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम का गठन कर दिया।जिलाधिकारी डॉक्टर इंद्रमणि त्रिपाठी ने भरोसा दिलाया,जो भी तथ्य सामने आएंगे,उसके आधार पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अब मैनपुरी की जनता पूछ रही है कि साहब, जो खामियां या सेफ्टी मेजर की अनदेखी पिछली टीम को छापेमारी दिखी थी,क्या नई टीम उन्ही चीजों को दोबारा नए चश्मे से देखेगी?खैर,अब देखना ये होगा कि, नई टीम होटल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने को लेकर कोई एक्शन लेती है? या फिर पिछली टीम की तरह होटल को ऑल इज वेल का सर्टिफिकेट थमा देती है।

संवाददाता

ब्रह्मेश कुमार,मैनपुरी