Banda SP Meeting Ruckus-पीडीए का नारा बुलंद करने वाली और समाजवाद का पाठ पढ़ाने वाली समाजवादी पार्टी यानि सपा के अंदर इन दिनों कुछ अलग ही लेवल का समाजवाद या यू कहें ड्रामा देखने को मिल रहा है।अब आप कहेंगे कि, भाई आखिर समाजवाद का ये नया पाठ कहां और किसके बीच पढ़ा जा रहा है। तो चलिये बताते हैं।
पूरा मामला बांदा जिले का है,जहां समाजवादी पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक बुलाई तो गई थी,पार्टी संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति पर चर्चा करने के लिए। लेकिन देखते ही देखते पूरी बैठक wwe की रेसलिंग में तब्दील हो गई।हुआ यूं कि,पार्टी के दो माननीय,यानी सांसद कृष्णा देवी पटेल और विधायक विशंभर यादव आपस में ही भिड़ गए।कार्यकर्ता आए तो थे, संगठन की रणनीति सुनने, लेकिन उन्हें बोनस में लाइव तू-तू, मैं-मैं का शो देखने को मिल गया।
कहते हैं कि खादी की दुश्मनी अक्सर दिलों में या बंद कमरों में होती है, लेकिन बांदा के समाजवादी पार्टी के सांसद और विधायक का दिल इतना बड़ा था कि उन्होंने अपनी अंदरूनी कलह को सरेआम कार्यकर्ताओं के सामने जाहिर कर दिया।समाजवादी पार्टी की इस बैठक में अंदरूनी खींचतान का पर्दा ऐसा उठा कि, विरोधियों की बांछें ही खिल गईं।
साजिश के आरोप से, बदतमीज के दहलीज तक
बताया जा रहा है कि,कार्यकारिणी की बैठक के दौरान सांसद कृष्णा देवी पटेल ने विधायक विशंभर यादव पर उनके खिलाफ साजिश रचने और गुटबाजी बढ़ाने का आरोप लगाया।सांसद के इतना बड़ा आरोप लगाने पर भला विधायक जी कहां चुप रहने वाले थे। ये बात सुनते ही विधायक जी का पारा 100 डिग्री के पार पहुंच गया। सियासत के कोई कच्चे खिलाड़ी तो हैं नहीं। लिहाजा सासंद जी को करारा जवाब दिया।
विधायक जी ने आव देखा न ताव,और ऐसा आरोप लगाने पर सांसद साहिबा को बदतमीज तक कह डाला।विधायक जी के इस जवाब के बाद बैठक का तापमान संगठनात्मक समीक्षा से सीधे राजनीतिक उबाल तक पहुंच गया।
बैठक थी, या बहस प्रतियोगिता? कार्यकर्ता कर रहे मंथन!
बेचारे कार्यकर्ता आए तो थे, बूथ मजबूत करने की टिप्स लेने,चुनावी रणनीति का गुढ़ मंत्र जानने,संगठन विस्तार के बारे में पार्टी से चर्चा करने।लेकिन थोड़ी देर में उन्हें समझ में आ गया कि,फिलहाल सबसे बड़ा विस्तार पार्टी का नहीं नेताओं के बीच मतभेदों का हो रहा है।
बैठक का हंगामा देख कार्यकर्ताओं का उड़ा फ्यूज?
अपने नेताओं के बीच चल रहे इस लाइव जुबानी जंग शो को देखकर वहां बैठे बेचारे कार्यकर्ता और पदाधिकारी ऐसे सन्न रह गए, जैसे किसी हॉरर फिल्म का सीन देख लिया हो।जो कार्यकर्ता कल तक जनता के बीच जाकर अपने संगठन की मजबूत की दुहाई देते थे,उसकी तरीफ करते नहीं थकते थे। वहीं आज बगलें झांक रहे थे। बैठक में अनुशासन की गरिमा की ऐसी धज्जियां उड़ीं कि, अनुशासन का ‘अ’ भी हवा में तैरता रह गया।
सपा के इस अंदरुनी कलह को लेकर विपक्ष खूब मजे ले रहा है,और पूछ रहा है कि,जो नेता आपस में ही लड़ रहे हैं,वो भला सूबे के विकास की बात क्या करेंगे।
पार्टी आलाकमान पर टिकी सबकी निगाहें
बांदा में हुई इस फजीहत बैठक के बाद अब पार्टी कार्यकर्ताओं समेत जनता की निगाहें शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं। देखना दिलचस्प होगा कि, यह मामला घर की बात घर में ही रह जाए,इस मुद्दे की तर्ज पर सुलझता है या फिर अगली बैठक में भी कार्यकर्ताओं को संगठन की जगह संवादों का नया एपिसोड देखने को मिलता है।
फिलहाल इतना तय है कि, बांदा में हुई सपा कार्यकारिणी की ये बैठक संगठन को कितना मजबूत कर पाई, यह तो बाद की बात है, लेकिन सियासी गलियारों को चर्चा का मसाला जरूर दे गई।खासकर विपक्ष को।
संवाददाता
मुजाहिद मजीदी
