Dial 112 Assault–जालौन।योगी राज में पुलिस का जलवा कायम है,ये बात आपने कई बार लोगों को कहते सुना होगा..लेकिन जालौन के कोंच कोतवाली थाना क्षेत्र में उल्टा ही देखने को मिल रहा है।हुआ कुछ ऐसा कि,कानून के लंबे हाथ खुद अपनी ही सुरक्षा नहीं कर पाए। और जनता से मिले प्रसाद के बाद अपनी पीठ सहलाते नजर आए। हालत ऐसी कि शिकायत सुनने गए होमगार्ड को ही शिकायत लिखवानी पड़ गई।मामला कुंवरपुरा गांव का है,जहां विवाद सुलझाने गई डायल112 की टीम खुद ही विवाद का शिकार बनकर लौट आई।
हुआ कुछ यूं कि,कुंवरपुरा गांव में दो लोग आपस में सिर फुटट्वल करने को बेताब थे।लठ्ठबाजी शुरू होती,उससे पहले ही एक पक्ष ने पुलिस को फोन कर बुला लिया। पुलिस भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सिटिजन फर्स्ट के स्लोगन को सच साबित करने पहुंच गई। गाड़ी से उतरते से पहले पुलिसकर्मी बड़े रौब में थे।उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि,कुंवरपुरा की जनता उनका इस तरह स्वागत करेगी।कहां तो हीरो की तरह एंट्री हुई थी,और कहां तो साहब को बुलाने वालों ने उनकी खातिर कर दी।
अब सवाल ये खड़ा होता है कि,जब ख़ाकी पहनकर ड्यूटी कर रहा जवान ही सुरक्षित नहीं है,तो फिर हम और आप कैसे सुरक्षित हो सकते हैं? और कैसे किसी मुसीबत में फंसने पर पुलिस को ये सोचकर फोन कर सकते हैं कि,वो हमारी रक्षा करेगी।जबकि उसकी तो खुद की सुरक्षा के वांदे पड़े हैं।क्या अब मौका-ए-वारदात,या घटना स्थल पर पुलिस कंट्रोल रूम में यह भी पूछा जाएगा,सर, मौके पर जाना सेफ है या पहले अपनी सुरक्षा के लिए दूसरी टीम बुला लें?
सोशल मीडिया पर खाकी वैसे ही बदनाम रहती ह।जरा सा गलती मिली नहीं कि,सोशल मीडिया की अदालत में वर्दीधारकों की बैंड बजा दी जाती है।पुलिसवालों के पूरे चरित्र का चित्रण कर दिया जाता है।ऊपर से हालात ऐसे हो जाएं कि, वर्दीधारक को ही जनता प्रसाद बांटने लगे,तो फिर सोचिये,अपराधियों के हौसले किस आसमान पर होंगे।वो तो पुलिसकर्मियों को कुछ समझेंगे ही नहीं।उनके सामने ही वारदात को अंजाम देने से खौफ नहीं खाएंगे।इसका संदेश जनता में क्या जाएगा,जरा सोचकर देखिये।
बॉलीवुड की फिल्मों में अक्सर आपने ये डायलॉग सुना होगा,”पुलिस से पंगा मत लेना।” लेकिन कुंवरपुरा की घटना देखकर लगता है कि किसी ने इस डायलॉग का नया संस्करण लिख दिया है,”पुलिस आए तो उसी से पंगा ले लेना।”
होमगार्ड की सरेआम हुई इस पिटाई के बाद पुलिस महकमे में वैसा ही हड़कंप मचा है, जैसा कि, हर बार किसी थप्पड़-कांड के बाद मचता है। फिलहाल होमगार्ड ने घटना की शिकायत अधिकारियों से कर दी है।जिसके बाद अधिकारी फाइलें का पन्ना पलट रहे हैं। चाय की चुस्की के साथ इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि,आखिर किस सुसंगत धारा में आरोपी पर केस दर्ज किया जाए। जिससे जनता के बीच कड़ा संदेश जाए। साथ ही इस बात पर भी मंथन हो रहा है कि, खाकी की लाठी का खौफ दोबारा कैस कामय किया जाए।
इधर जनता पूछ रही है कि आधी रात को बदमाशों का एनकाउंटर करने वाली पुरिस आखिरकार गांव के एक शिकायतकर्ता के सामने इतनी अहिंसावादी कैसे हो गई?
जालौन की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में डायल 112 की नौकरी आसान नहीं है। कहां तो आप किसी की मदद करने जाएंगे, और पता चला कि,आपको ही मदद की जरूरत पड़ गई।इस पूरी फजीहत के बाद उम्मीद है कि, जालौन पुलिस जल्द ही उन आरोपियों को गिरफ्तार करेगी,जिनके खिलाफ होमगार्ड ने शिकायत दर्ज कराई है।जिससे पुलिस का खोया हुआ खौफ और जनता की हंसी दोनों पर विराम लग सके।
संवाददाता
महेन्द्र कुमार गौतम, जालौन
