1- क्या नागरिक संविधान के अनुच्छेद-44 (समान नागरिक संहिता) के प्रावधानों से परिचित हैं?
2- क्या लड़कियों और लड़कों की विवाह योग्य न्यूनतम आयु सभी के लिए पूरी तरह एक समान होनी चाहिए?
3- क्या सभी समुदायों के लिए तलाक के आधार और उसकी कानूनी प्रक्रिया एक जैसी होनी चाहिए?
4- क्या लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाना उचित है?
UCC समिति क्या कर रही है?
UCC समित को 25 जुलाई तक ऑनलाइन पोर्टल पर मिले सुझावों और आपत्तियों को इकट्ठा करना है इसके बाद ड्राफ्ट के लिए अंतिम प्रारूप तैयार किया जा सकेगा…इसके लिए समिति संभाग स्तरीय बैठकें कर रही है और आम जनता से सीधा संवाद भी कर रही है…साथ ही जनता में SMS के माध्यम से जागरूकता भी फैलाई जा रही है और जनता से प्रक्रिया में सीधा जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है
पहले ही गरमाई सियासत
UCC का मुद्दा छिड़े और सियासत न गरमाया ऐसा हो सकता है क्या? तो UCC की तैयारियां शुरू होते ही राज्य की बीजेपी सरकार के नेताओं और कांग्रेस समेत तमाम विपक्ष में तीखी बयानबाजी शुरु हो गई है…कांग्रेस ने जहां इसे सीधे सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की साजिश करार दिया है तो वहीं बीजेपी ने कांग्रेस की बयानबाजी को तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ा है….कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा के मुताबिक UCC को लेकर कोई ड्राफ्ट तैयार नहीं किया गया है, ऐसे में जनता से सुझाव मांगने का क्या औचित्य है…कांग्रेस के मुताबिक रोजगार, बिजली, पानी, बिजली पानी और किसानों की मूलभूत समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए राज्य सरकार UCC का शिगूफा छोड़ रही है…बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इसे लेकर पलटवार किया है उनके मुताबिक जनता के सुझाव के बाद एक ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा और सभी वर्गों की राय इसमें शामिल की जाएगी…राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है इसलिए वह यूसीसी को लेकर अब सवाल उठा रही है
UCC को लेकर आगे क्या?
10 और 11 जुलाई की बैठकों के बाद तय होगा कि विभिन्न राजनीतिक संगठनों, समाजिक संगठनों और धार्मिक नेताओं की इस मुद्दे पर क्या राय है इसके बाद UCC समिति फाइनल ड्राफ्ट तैयार करेगी….इसके बाद कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा …
