राजस्थान में UCC लाने की तैयारी में भजनलाल सरकार

UCC IN RAJASTHAN-उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब राजस्थान में बीजेपी सरकार समान नागरिक संहिता या कहें राजस्थान समान नागरिक संहिता RUCC लागू करने की तैयारियां तेज कर चुकी है…इसके प्रारूप के लिए 5 सदस्यीय समिति का ऐलान भी कर दिया गया है…जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत जय रंंजना देसाई कर रही हैं….सामान नागरिक संहिता मुख्य रूप से नागरिकों को एक समान कानून के तहत लाने की प्रक्रिया है, जिसे राज्य सरकार जल्द से जल्द लागू करना चाहती है…UCC का मतलब एक ऐसा समान कानून से है, जिसमें शादी, तलाक, और संपत्ति के बंटवारे जैसे निजी मामले सभी धर्मों के लोगों के लिए एक समान होते हैं
UCC समिति और फोकस एरिया
राजस्थान में UCC समिति मुख्य तौर पर उत्तराखंड मॉडल और देश के दूसरे राज्यों में समान नागरिक अधिकारों का अध्ययन कर सामाजिक जटिलताओं को मद्देनजर रखते हुए कानून का मसौदा तैयार करने में जुटी है…सरकार आधिकारिक यूसीसी पोर्टल ucc.rajasthan.gov.in पर नागरिकों से 19 सवालों के माध्यम से राय मांग रही है. इनमें से अधिकांश सवाल ‘हाँ’ या ‘ना’ आधारित हैं…UCC पोर्टल पर मुख्य रूप से तलाक, भरण पोषण, उत्तराधिकार, विवाह, संपत्ति अधिकार, लिव इन रिलेशन शिप को लेकर सुझाव मांगे जा रहे हैं
UCC में प्रमुख तौर पर किन मुद्दोें पर फोकस
बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध- सभी धर्मों और समुदायों के पुरुषों के लिए एक से अधिक विवाह करने पर कानूनी रोक
विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण- शादी और तलाक को कानूनी रूप से रजिस्टर्ड कराना अनिवार्य होगा
पैतृक संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार- बेटों की तरह बेटियों को भी पैतृक संपत्ति में कानूनी तौर पर बराबर का अधिकार
लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण-लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए अपनी रिलेशनशिप को रजिस्टर्ड कराना अनिवार्य करने का प्रस्ताव
भरण-पोषण और गोद लेने के नियम: तलाक के बाद गुजारा भत्ता (भरण-पोषण) और बच्चों को गोद लेने की प्रक्रियाओं को सरल और धर्म-निरपेक्ष बनाना
UCC में किन सवालोें पर फोकस है?
RUCC को लेकर जनता से जो सामान्य सवाल पूछे जा रहे हैं उनमें-

1- क्या नागरिक संविधान के अनुच्छेद-44 (समान नागरिक संहिता) के प्रावधानों से परिचित हैं?

2- क्या लड़कियों और लड़कों की विवाह योग्य न्यूनतम आयु सभी के लिए पूरी तरह एक समान होनी चाहिए?

3- क्या सभी समुदायों के लिए तलाक के आधार और उसकी कानूनी प्रक्रिया एक जैसी होनी चाहिए?

4- क्या लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाना उचित है?

UCC समिति क्या कर रही है?

UCC समित को 25 जुलाई तक ऑनलाइन पोर्टल पर मिले सुझावों और आपत्तियों को इकट्ठा करना है इसके बाद ड्राफ्ट के लिए अंतिम प्रारूप तैयार किया जा सकेगा…इसके लिए समिति संभाग स्तरीय बैठकें कर रही है और आम जनता से सीधा संवाद भी कर रही है…साथ ही जनता में SMS के माध्यम से जागरूकता भी फैलाई जा रही है और जनता से प्रक्रिया में सीधा जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है

पहले ही गरमाई सियासत

UCC का मुद्दा छिड़े और सियासत न गरमाया ऐसा हो सकता है क्या? तो UCC की तैयारियां शुरू होते ही राज्य की बीजेपी सरकार के नेताओं और कांग्रेस समेत तमाम विपक्ष में तीखी बयानबाजी शुरु हो गई है…कांग्रेस ने जहां इसे सीधे सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की साजिश करार दिया है तो वहीं बीजेपी ने कांग्रेस की बयानबाजी को तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ा है….कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा के मुताबिक UCC को लेकर कोई ड्राफ्ट तैयार नहीं किया गया है, ऐसे में जनता से सुझाव मांगने का क्या औचित्य है…कांग्रेस के मुताबिक रोजगार, बिजली, पानी, बिजली पानी और किसानों की मूलभूत समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए राज्य सरकार UCC का शिगूफा छोड़ रही है…बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इसे लेकर पलटवार किया है उनके मुताबिक जनता के सुझाव के बाद एक ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा और सभी वर्गों की राय इसमें शामिल की जाएगी…राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है इसलिए वह यूसीसी को लेकर अब सवाल उठा रही है

UCC को लेकर आगे क्या?

10 और 11 जुलाई की बैठकों के बाद तय होगा कि विभिन्न राजनीतिक संगठनों, समाजिक संगठनों और धार्मिक नेताओं की इस मुद्दे पर क्या राय है इसके बाद UCC समिति फाइनल ड्राफ्ट तैयार करेगी….इसके बाद कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा …