लाल आतंक के साये से निकलकर बीजापुर बन रहा इको-टूरिज्म का हब

Bijapur Tourism-बीजापुर एक समय नक्सली हिंसा की वजह से देशभर में चर्चित रहने वाला जिला था. यहां की धरती पर लाल आतंक का साया बना रहता था. लेकिन गृह मंत्री अमित शाह और पीएम मोदी के संकल्प ने लाल आतंक के खात्मे के लिए मिशन ने भय के साये में जीने वाले लोगों को निर्भय जीवन दे दिया. सुरक्षा बलों ने इस अपने पराक्रम और अदम्य साहस से कर दिखाया. कभी यहां नक्सलियों के आतंक से पूरा इलाका थर्राया करता था, गांव वाले भय के साये में जीते थे. परिवार के किसी सदस्य को नक्सली उठा ले जाते, और उसे नक्सली कार्यों में लगा देते. अपनों को ले जाते देखकर पूरा परिवार मायूस हो जाया करता. भय इतना कि खुलकर विरोध भी नहीं कर पाते थे. लेकिन अब ये गुजरे जमाने की बात हो गई है… अब यही बीजापुर अपनी नई पहचान गढ़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. नक्सलवाद के प्रभाव में कमी आने के बाद राज्य सरकार की गाइड लाइन पर जिला प्रशासन ने पर्यटन, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की व्यापक योजना तैयार की है.
घने जंगल, कल-कल बहते झरने, प्राकृतिक घाटियां और समृद्ध वन्य जीवन बीजापुर के पास प्रकृति का अनमोल खजाना है. वर्षों तक नक्सलवाद की वजह से इन प्राकृतिक स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच सीमित रही. लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. जिला प्रशासन इन प्राकृतिक धरोहरों को पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है.

प्रशासन की प्राथमिकताओं में इंद्रावती टाइगर रिजर्व भी शामिल है…लंबे समय से पर्यटकों की पहुंच से दूर रहे इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को फिर से शुरू करने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए सड़क संपर्क, सुरक्षा व्यवस्था, आवासीय सुविधाओं…और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजना बनाई गई है.
बीजापुर में सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देना मकसद नहीं है…बल्कि स्थानीय लोगों को इससे सीधे जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है. कम्यूनिटी टूरिज्म मॉडल के जरिए ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. ताकि पर्यटन से होने वाला लाभ सीधे गांवों तक पहुंचे…और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें.
इसके साथ ही जिले में उपलब्ध लघु वनोपज के मूल्य संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा…इससे वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की आय बढ़ेगी…और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी…प्रशासन का मानना है कि पर्यटन और वनोपज आधारित गतिविधियों का यह मॉडल विकास और रोजगार दोनों के नए रास्ते खोलेगा.