ब्रह्म सत्यं, जगत् मिथ्या” : विज्ञान, दर्शन और आत्मानुभूति का समन्वित रहस्य———-

भारतीय दर्शन के इतिहास में आदि शंकराचार्य का यह महावाक्य-“ब्रह्म सत्यं, जगत् मिथ्या”(Brihm saty jagat mithya)-सदैव जिज्ञासा और विमर्श का केंद्र रहा है। पहली दृष्टि में यह कथन संसार के […]

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