मैनपुरी के सिविल लाइंस इलाके में गरजा प्रशासन का बुलडोजर,हटाया गया अवैध अतिक्रमण

मैनपुरीबुधवार को सिविल लाइन इलाके में अचानक प्रशासन की नींद खुली..अक्सर चैन की नींद सोने वाला प्रशासन जागता हुआ दिखाई दिया।मौका था अवैध अतिक्रमण को जमींदोज करने का(Mainpuri Bulldozer Action)।अमूनन फाइलों की कछुआ चाल के लिए मशहूर प्रशासन यहां चीते की रफ्तार से दौड़ता नजर आया।

जी हां,वही अवैध अतिक्रमण जो रातों-रात या एकाएक नहीं हुआ,बल्कि सालों से साहब लोगों की नाक के नीचे, उन्हीं की सरकारी गाड़ियों के गुजरने वाले रास्तों पर शनै-शनै पुष्पित-पल्लवित हो रहा था। शायद उस वक्त इन सरकारी अधिकारियों की आंखे बंद थीं।या यू  कहें कि बंद की हुई थी।लेकिन बुधवार दिनांक 24जून को साहब लोगों को ये सब अवैध अतिक्रमण नजर आने लगा।फिर क्या था पहुंच गए लाव-लश्कर लेकर।

सिविल लाइन की सड़कों पर था अलग ही नजारा

सिविल लाइन की सड़कों पर बुधवार को पूरा नजारा किसी ऐतिहासिक युद्ध जैसा था।एक तरफ नगर पालिका का गरजता हुआ बुलडोजर जो किसी फाइटर जेट से कम नहीं लग रहा था,तो दूसरी तरफ उपजिलाधिकारी यानि एसडीएम साहब,अधिशासी अधिकारी यानि ईओ साहब और पुलिस बल के जवानों ने मोर्चा संभाला था।ऐसा लग रहा था,मानो जंग का ऐलान करने का आदेश दे रहे हों।

यहां सवाल ये उठता है कि,ऐसी तत्परता और फुर्ती प्रशासन हर मामले में क्यों नहीं दिखाता।बात चाहे अपराधियों को पकड़ने की हो या फिर महिलाओं की सुरक्षा की।भ्रष्टाचरा मिटाने की हो या फिर खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत कराने की।खैर छोड़िये जाने दीजिये,इन बातों को।बुलडोजर है,जिसका अपना एक अलग जलवा है,वो भी जब वो सरकारी महकमे का हो। फिर भला प्रशासनिक अमला इस मामले में कहां पीछे रहने वाला था। लिहाजा वो भी पहुंच गया बुलडोजर के ग्लैमरस का लुत्फ उठाने।

जब अवैध अतिक्रमण हो रहा था,तब कहां था प्रशासन?

जिला प्रशासन के आदेश पर जैसे ही बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुई और गरीबों की दुकानें तोड़ी जाने लगीं।वैसे ही उनके सब्र का बांध टूट गया। हर तरफ बस लोगों के रोने और अपना दर्द बयां करने की आवाज सुनाई दे रही थी।लोगों का साफ कहना था,साहब जब हम अपनी गाड़ी कमाई लगाकर अपनी ये दुकानें खड़ी कर रहे थे,तब आप किस पवित्र समाधि या ध्यान में लीन थे?उस वक्त आपको क्या ये सब दिखाई नहीं पड़ रहा था?क्या आपकी आंखें खराब हो गई थी,या फिर जेब गर्म होने के सुकून ने आपको रोक रखा था?

गरीब सवाल करते रहे,लेकिन साहब लोगों के पास इन चुभते सवालों का जवाब शायद केवल बुलडोजर के शोर में था।कहने में गुरेज नहीं कि,नियम कायदे हमेशा गरीबों के पेट पर लात मारने के लिए ही होते हैं।बड़े-बड़े उद्योगपतियों के अवैध महल तो आज भी सीना ताने खड़े हैं,लेकिन क्या मजाल की प्रशासनिक अमला इनके इर्द-गिर्द भी भटक पाए।इनका कार्रवाई तो केवल उन गरीबों पर चलती है जिनकी रोजी-रोटी ही इन्ही अवैध ठिकानों के जरिये चलती है।

कार्रवाई जारी रहने की प्रशासन ने दी चेतावनी

प्रशासनिक अधिकारियों का साफ कहना था कि,’’आगे भी अवैध अतिक्रमण के खिलाफ उनकी ये कार्रवाई जारी रहेगी।और जो लोग भी अवैध अतिक्रमण करेंगे,उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।‘’

सुनने में आपको भी लगता होगा कि,अब जिला प्रशासन अवैध अतिक्रमण को जिले से हटाकर ही दम लेगा।लेकिन ये केवल कुछ दिनों का खेल है,तक तक प्रशासन का बुलडोजर सुर्खियां बटोरेगा।पेपर की हेडलाइन बनेगा।जब तक मीडिया के कैमरा ऑन रहेंगे,साहब लोग भी एक्टिव दिखेंगे। और जैसे ही मामला शांत होगा,चढ़ावे का नया दौर शुरू हो जाएगा। और फिर अधिकारी लोगों की आंखें बंद हो जाएंगी।उसी जगह पर दोबारा से नई दुकानें सज जाएंगी। और फिर अगले साल नया अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाएगा।आखिरकार नगर पालिका के बजट में भी तो रोटेशन होना जरूरी है,नहीं तो अधिकारियों की जेब खर्च कैसे चलेगी।

अब कुछ दिन होगी अधिकारियों की जय-जयकार

आने वाले कुछ दिनों तक हर पेपर और आम जन के बीच जिला प्रशासन की ईमानदारी का डंका बजेगा।अमीर वर्ग की गाड़ियां इस मलबे से गुजरते वक्त चौड़ी सड़क होने का आनंद लेंगी। सड़कें चौड़ी होना जरूरी है,इसमें भी दो राय नहीं है कि, अवैध अतिक्रमण नहीं होना चाहिए।लेकिन सवाल उस सिस्टम पर है,जो हमेशा गरीबों पर ही बुलडोजर चलाता है।रेहड़ी-पटरी वालों के सामने ही उसका सिंघम रूप नजर आता है।रसूदखोरों के सामने वो हमेशा भीगी बिल्ली बना रहता है। चलिये हमारी तरफ से भी मैनपुरी जिला प्रशासन को इस सफल बुलडोजर अभियान के लिए बारम्बार नमन।

संवाददाता

ब्रह्मेश कुमार,मैनपुरी